शहर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने रविवार को सागर की लाइफ लाइन माने जाने वाले राजघाट जल परियोजना का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल गुणवत्ता, आपूर्ति प्रणाली और तकनीकी व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान नगर निगम कमिश्नर राजकुमार खत्री, उपायुक्त एस एस बघेल, इंजीनियर संजय तिवारी और सब इंजीनियर राहुल रैकवार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जल शोधन प्रक्रिया, जल गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली और संबंधित अभिलेखों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से पानी की गुणवत्ता जांच से संबंधित लॉग बुक का अवलोकन किया और मौके पर ही जल नमूनों की जांच कराई। परीक्षण में पानी का पीएच स्तर 7.30 पाया गया, जो मानक के अनुरूप और पेयजल के लिए सुरक्षित माना गया। कलेक्टर ने अधिकारियों से सप्लाई की शुद्धता और निरंतरता को लेकर विस्तृत जानकारी ली और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि नागरिकों को हर समय स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध हो।

कलेक्टर श्रीमती पाल ने निरीक्षण के दौरान जल गुणवत्ता परीक्षण में उपयोग किए जा रहे रसायनों, उनकी मात्रा और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया की भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उपस्थित केमिस्ट से परीक्षण पद्धति को समझते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि जल गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने क्लोरीन हाउस का भी जायजा लिया और जल शोधन में क्लोरीन के उपयोग की प्रक्रिया को समझा। इसके साथ ही उन्होंने टाटा द्वारा निर्मित 5.7 एमएलडी क्षमता वाले फिल्टर हाउस में स्थापित आधुनिक SCADA सिस्टम का अवलोकन किया। इस सिस्टम के माध्यम से जल आपूर्ति की निगरानी और नियंत्रण किया जाता है। कलेक्टर ने अधिकारियों से इसके संचालन और प्रभावशीलता के बारे में जानकारी लेते हुए कहा कि इस तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि जल आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।
कलेक्टर ने विशेष रूप से पाइपलाइन लीकेज की समस्या पर ध्यान देते हुए निर्देश दिए कि लीकेज की लगातार मॉनिटरिंग की जाए और समय पर सुधार कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में दूषित पानी की आपूर्ति नहीं होनी चाहिए, इसके लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी अत्यंत आवश्यक है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि राजघाट परियोजना के माध्यम से सागर नगर के 48 वार्ड, मकरोनिया क्षेत्र के 18 वार्ड और छावनी मंडल में लगभग 6 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इस परियोजना के तहत बांध की जल संग्रहण क्षमता 62.67 लाख घन मीटर है और इसका कैचमेंट एरिया 472 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। फिल्टर हाउस की कुल क्षमता 88.20 एमएलडी है, जो शहर की जल आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जल वितरण प्रणाली के तहत नगर निगम क्षेत्र में कुल 8 ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा लगभग 390 किलोमीटर नई पाइपलाइन और 40 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाया गया है, जिससे पूरे शहर में जल आपूर्ति की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा एमपी यूडीसी के मार्गदर्शन में इस परियोजना का संचालन और संधारण किया जा रहा है।

निरीक्षण के दूसरे चरण में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने नए आरटीओ कार्यालय के पास स्थित नए बस स्टैंड का भी दौरा किया। यहां उन्होंने यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बस स्टैंड पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने कहा कि शहर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। जल आपूर्ति और परिवहन जैसी मूलभूत सेवाओं की गुणवत्ता सीधे नागरिकों के जीवन स्तर को प्रभावित करती है, इसलिए इन क्षेत्रों में निरंतर निगरानी और सुधार आवश्यक है।
कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण से प्रशासनिक अमले में सक्रियता बढ़ी है और यह संदेश गया है कि नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस प्रकार के निरीक्षणों से शहर की व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार की उम्मीद की जा रही है।