प्रतिभा पाल सख्त, 30 मई तक हर हाल में विस्थापन पूरा करने के निर्देश !

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सागर जिले की महत्वाकांक्षी बंडा-उल्दन सिंचाई परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के लिए प्रशासन ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने परियोजना से प्रभावित ग्रामवासियों के विस्थापन, मुआवजा वितरण और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित परिवारों का पुनर्वासन 30 मई 2026 तक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि विस्थापन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पुनर्वास स्थलों पर पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था समय रहते पूरी कर ली जाए।

परियोजना के कार्यपालन यंत्री अनिरुद्ध आनंद ने जानकारी दी कि बंडा, बांदरी और सागर तहसील के अंतर्गत कुल 2068 प्रभावित हितग्राहियों को लगभग 198.27 करोड़ रुपये की मुआवजा एवं अनुदान राशि का भुगतान शेष है। इस पर कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे 10 दिनों के भीतर शेष सभी भुगतान प्रस्ताव तैयार कर भू-अर्जन शाखा को भेजना सुनिश्चित करें, ताकि मुआवजा वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो।

कलेक्टर ने भू-अर्जन प्रक्रिया में आ रही विसंगतियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई मामलों में मिसल बंदोबस्त और वर्तमान खसरे में दर्ज भूमि के रकवे में अंतर पाया गया है। इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की विधिवत जांच कर भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 33 के तहत आवश्यक कार्रवाई कर अभिलेखों को अद्यतन किया जाए और उसके बाद ही मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में जल निगम द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि पुनर्वास स्थल ग्राम पनारी में भूजल की उपलब्धता नहीं है, जिससे ट्यूबवेल के माध्यम से पेयजल आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। इस पर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जब तक बांध में जल भराव नहीं हो जाता, तब तक आसपास के निजी जल स्रोतों जैसे कुएं और ट्यूबवेल का अधिग्रहण कर पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अनुविभागीय अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने संभावित समस्याओं पर भी चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि गढ़पहरा-धामोनी और बंडा-बांदरी मार्ग आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आने के कारण लगभग तीन महीने तक बंद रह सकते हैं। इस पर कलेक्टर ने परियोजना प्रबंधक को निर्देश दिए कि वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाए और मार्ग डायवर्जन के संकेतक बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही, आमजन को समय रहते सूचना देने के लिए समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई जाए।

पुनर्वासित परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं को भी बैठक में उठाया गया। ग्रामीणों ने शिकायत की कि पुराने कनेक्शन होने के बावजूद नए स्थान पर कनेक्शन के लिए शुल्क मांगा जा रहा है। इस पर विद्युत विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुराने कनेक्शनों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बंडा, बांदरी और मालथौन क्षेत्र में 7 दिनों के भीतर विशेष कैंप आयोजित कर सभी पुनर्वासित परिवारों को शत-प्रतिशत विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं।

परियोजना प्रबंधक ने जानकारी दी कि प्रथम जल भराव के दौरान 457 मीटर क्रेस्ट लेवल पर बहरोल, उल्दन, पिपरिया इल्लाई, सलैया खुर्द, हनौता उबारी, किरोला, कुल्ल और मुडिया गुसाई जैसे गांवों के लगभग 386 मकान डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। ऐसे में इन गांवों के परिवारों का समय रहते पुनर्वासन अत्यंत आवश्यक है। कलेक्टर ने इस पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में प्रभावित परिवारों को जोखिम में नहीं छोड़ा जाएगा और 31 मई 2026 से पहले सभी का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पुनर्वास कार्य में सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर किया जाए। जल संसाधन विभाग को भी निर्देशित किया गया कि वह भू-अर्जन अधिकारियों को आवश्यक सहयोग और स्टाफ उपलब्ध कराए, ताकि कार्य में तेजी लाई जा सके।

बैठक में अपर कलेक्टर अविनाश रावत, एसडीएम मनोज चौरसिया, आरती यादव और मुनव्वर खान सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि प्रशासन बंडा सिंचाई परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहता है। समयबद्ध विस्थापन, पारदर्शी मुआवजा वितरण और बेहतर पुनर्वास सुविधाओं के माध्यम से यह परियोजना न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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