बंडा परियोजना में तेजी: 15 दिनों में मुआवजा प्रकरणों का निराकरण !

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सागर जिले में चल रही महत्वाकांक्षी बंडा परियोजना के तहत प्रशासन ने कार्यों में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सोमवार को उलदन बांध और विस्थापन कॉलोनी का निरीक्षण करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र हितग्राही मुआवजा से वंचित न रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शेष बचे सभी मुआवजा प्रकरणों का निराकरण 15 दिनों के भीतर शिविर लगाकर किया जाए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी कहा कि जल भराव से प्रभावित सभी ग्रामवासियों को 30 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से विस्थापित किया जाए। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से अपील की कि वे समय सीमा से पहले अपने गांव खाली कर विस्थापन कॉलोनी में पहुंचें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा या जोखिम से बचा जा सके।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किए जाएं ताकि जून माह में बांध पूरी क्षमता के साथ जल भराव के लिए तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के. वी., एसडीएम आरती यादव, परियोजना प्रबंधक अनिरुद्ध आनंद, तहसीलदार मोहित जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने विस्थापन कॉलोनी में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कॉलोनी में आवास, सड़क, पहुंच मार्ग, शुद्ध पेयजल, पाइपलाइन, विद्युत व्यवस्था, नालियां, ड्रेनेज सिस्टम और सार्वजनिक शौचालय जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और उन्हें बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

परियोजना प्रबंधक अनिरुद्ध आनंद ने जानकारी देते हुए बताया कि बंडा परियोजना को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा 3219.62 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना बड़े स्तर पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।

परियोजना के अंतर्गत सागर जिले के बंडा तहसील में 35,253 हेक्टेयर, शाहगढ़ में 10,675 हेक्टेयर, मालथौन में 16,266 हेक्टेयर तथा छतरपुर जिले के बक्सवाहा तहसील में 13,379 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। कुल मिलाकर 278 गांवों में लगभग 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र को इस परियोजना से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

बांध की कुल जल ग्रहण क्षमता 313.07 मिलियन घन मीटर निर्धारित की गई है। इसमें से 16.11 मिलियन घन मीटर पानी 412 गांवों के पेयजल के लिए तथा 1.018 मिलियन घन मीटर पानी औद्योगिक क्षेत्र सौरई के लिए आरक्षित किया गया है। इस प्रकार कुल 17.128 मिलियन घन मीटर पानी पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए सुरक्षित रहेगा।

निर्माण कार्य की प्रगति पर जानकारी देते हुए बताया गया कि बांध का निर्माण कार्य लगभग 75 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। कंक्रीट बांध का कार्य 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। बांध की कुल लंबाई 926 मीटर है, जिसमें 756 मीटर मिट्टी का बांध और 170 मीटर कंक्रीट बांध शामिल है।

परियोजना के अंतर्गत पाइपलाइन प्रणाली का कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिसकी भौतिक प्रगति अभी तक 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि जून 2026 तक बांध का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाए, जबकि संपूर्ण परियोजना दिसंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।

यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी, क्योंकि इससे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही पेयजल संकट से जूझ रहे गांवों को राहत मिलेगी और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अंत में अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जिले के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे समय पर पूर्ण करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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