सागर जिले में सागर-बीना नेशनल हाईवे-934 पर टोल कंपनी की मनमानी का मामला सामने आया है, जिसने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी है। किशनपुरा के पास टोल प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर सरकारी सड़क को ही खोद दिया गया, जिससे नरयावली, जरुआखेड़ा सहित लगभग 20 गांवों का भोपाल जाने वाला मुख्य मार्ग बाधित हो गया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और वे मजबूरी में टोल प्लाजा से होकर गुजरने को विवश हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस सड़क को खोदा गया है, वह वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रही है। इस रास्ते के बंद हो जाने से अब उन्हें लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है या फिर टोल बैरियर से होकर गुजरना पड़ता है, जहां उनसे शुल्क वसूला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि टोलकर्मी न केवल मनमानी तरीके से पैसे वसूल रहे हैं, बल्कि कई बार अभद्र व्यवहार भी करते हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मामले की पड़ताल के दौरान सामने आया कि टोल प्लाजा पर नियमों की अनदेखी कर कैश में लेनदेन किया जा रहा है। बिना फास्टैग वाले वाहनों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोगुना टोल शुल्क लेकर रसीद देना अनिवार्य है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग नजर आई। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कई बार तय नियमों को दरकिनार कर कम राशि लेकर बिना रसीद ही वाहनों को आगे बढ़ा दिया जाता है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
भास्कर टीम ने जब बिना फास्टैग वाहन के साथ स्थिति का जायजा लिया, तो वहां स्पष्ट रूप से सौदेबाजी होती दिखाई दी। कर्मचारियों और वाहन चालकों के बीच रकम को लेकर बातचीत होती रही और अंततः बिना किसी रसीद के वाहन को निकलने दिया गया। वापसी के दौरान भी यही स्थिति देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई एक-दो बार की घटना नहीं, बल्कि नियमित रूप से अपनाई जा रही प्रक्रिया है।
इस पूरे मामले पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि फास्टैग न होने की स्थिति में दोगुना टोल वसूलने का नियम है और रसीद देना अनिवार्य है। यदि बिना रसीद पैसे लेकर वाहनों को छोड़े जाने की शिकायत मिलती है, तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम अमन मिश्रा ने कहा कि उन्हें किशनपुरा के पास रास्ता बंद किए जाने की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब जानकारी मिलने के बाद वे इसकी जांच करवाएंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि टोल प्रबंधन द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की मनमानी से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें इसी मार्ग का उपयोग करना पड़ता था, लेकिन अब रास्ता बंद होने से उन्हें अतिरिक्त समय और पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। खासकर किसानों और छोटे व्यापारियों पर इसका अधिक असर पड़ा है, जिन्हें अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।
इस घटना ने एक बार फिर टोल प्लाजा संचालन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सड़क को जानबूझकर खोदकर लोगों को टोल से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी हनन है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद किए गए रास्ते को तुरंत बहाल किया जाए और टोल प्लाजा पर हो रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कुल मिलाकर, यह मामला न केवल एक क्षेत्रीय समस्या है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करते हैं, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और व्यवस्था में सुधार हो सके।