भोपाल, मध्यप्रदेश – जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह के विवादित बयान को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ उनके आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद से कांग्रेस लगातार हमलावर रही है और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धाराएं लगाकर केस दर्ज किया है।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और पुलिस कार्रवाई
जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी को मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस ने शाह के खिलाफ आईपीसी की धारा 152 (धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास), 196(1)(बी) (झूठे दस्तावेज का उपयोग), और 197(1)(सी) (सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक मंत्री द्वारा इस तरह का बयान देना गंभीर मामला है और इससे सामाजिक सौहार्द को खतरा हो सकता है।

कांग्रेस का प्रदर्शन और राज्यपाल को ज्ञापन
इस मामले में कांग्रेस लगातार सरकार पर हमला बोल रही है। शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपकर मंत्री विजय शाह को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।
इसके बाद, कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े पहनकर राजभवन के बाहर धरना प्रदर्शन किया। उमंग सिंघार ने कहा, “भाजपा सरकार में मंत्री द्वारा महिला अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। यह न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि संविधान की मर्यादा को चुनौती है। सीएम मोहन यादव को तुरंत उन्हें मंत्रिमंडल से हटाना चाहिए।”
सीएम मोहन यादव का पलटवार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदर्शन को नाटकीय बताते हुए कहा कि “कांग्रेस कोर्ट का अपमान करने से बाज नहीं आएगी।” उन्होंने कहा, “यह मामला कोर्ट में है, और हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। लेकिन कांग्रेस का इतिहास रहा है कि वह कोर्ट के फैसलों को नजरअंदाज करती है। इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद देश में इमरजेंसी लगा दी थी। क्या कांग्रेस ने सिद्धारमैया को हटाया था जब कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला दिया था?”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- भाजपा का कहना है कि कांग्रेस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जबकि यह मामला न्यायपालिका के समक्ष है।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिलाओं और आदिवासियों के प्रति संवेदनशील नहीं है और विजय शाह का बयान इसका प्रमाण है।
- आदिवासी संगठनों ने भी इस बयान की निंदा की है और मांग की है कि सरकार तुरंत कार्रवाई करे।
आगे की कार्रवाई
अब न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस जांच शुरू करेगी, जबकि विपक्ष का दबाव बना हुआ है कि सरकार मंत्री को हटाए। यदि शाह पर आरोप साबित होते हैं, तो यह मध्यप्रदेश सरकार के लिए बड़ा विवाद बन सकता है।

यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में तब्दील हो गया है, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस जारी है। अगले कुछ दिनों में कोर्ट की कार्रवाई और राज्य सरकार का रुख निर्णायक होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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