भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित और डिजिटल रूप में सुरक्षित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम पांडुलिपि मिशन” के तहत सागर जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
यह विशेष अभियान 16 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण करना है। इस मिशन के माध्यम से उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दस्तावेजों को संरक्षित किया जाएगा, जो अब तक निजी संस्थानों, मंदिरों, आश्रमों, पुस्तकालयों और ट्रस्टों में सुरक्षित हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।
मिशन के तहत कार्य संचालन भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार किया जाएगा। राज्य स्तर पर इसका समन्वय संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, भोपाल द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर गठित समिति इसकी निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
जिला स्तरीय समिति में विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति में पंचायत सीईओ विवेक के.वी., अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अमन मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट एवं नोडल अधिकारी गगन विसेन सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक राजेन्द्र यादव, शासकीय पं. दीनदयाल उपाध्याय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के प्राध्यापक अमर जैन तथा बीना स्थित अनेकांत ज्ञान मंदिर से राकेश जैन को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

इस समिति की जिम्मेदारी जिले में स्थित विभिन्न निजी एवं सार्वजनिक संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों की पहचान करना और उन्हें “ज्ञान भारतम” मोबाइल एप के माध्यम से पंजीकृत करना है। इसके लिए शोध संस्थानों, महाविद्यालयों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों, आश्रमों और निजी ट्रस्टों से संपर्क कर वहां उपलब्ध हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी एकत्र की जाएगी।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस पहल को जिले की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने समिति के सदस्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अभियान को गंभीरता से लें और निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिक से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन न केवल इतिहास को संजोने का कार्य करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने में भी सहायक सिद्ध होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सागर सहित मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में प्राचीन पांडुलिपियों का बड़ा भंडार मौजूद है, जिनमें धार्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और साहित्यिक विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां निहित हैं। इनका डिजिटलीकरण होने से शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को इन तक आसान पहुंच मिल सकेगी।
“ज्ञान भारतम पांडुलिपि मिशन” के तहत चलाया जा रहा यह अभियान न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का कार्य है, बल्कि डिजिटल इंडिया की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे देश की अमूल्य बौद्धिक संपदा को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकेगी।
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, संस्थानों और ट्रस्टों से अपील की है कि यदि उनके पास किसी भी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, तो वे इस अभियान में सहयोग करें और उन्हें पंजीकृत कराएं। इससे न केवल उनकी धरोहर सुरक्षित होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान भी सुनिश्चित हो सकेगी।
इस प्रकार सागर जिले में “ज्ञान भारतम पांडुलिपि मिशन” के तहत शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में सांस्कृतिक संरक्षण और ज्ञान के प्रसार के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।