घटना का पूरा विवरण
बीना क्षेत्र में सोमवार रात को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक की पहचान वीर सावरकर वार्ड निवासी पुष्पेंद्र अहिरवार (28) के रूप में की गई है। हादसा तब हुआ जब पुष्पेंद्र अपने साले अमित अहिरवार और मित्र योगेश अहिरवार के साथ बाइक से खुरई की ओर जा रहे थे।
जैसे ही उनकी बाइक बारधा गांव के पास पहुंची, एक अज्ञात वाहन ने सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों बाइक सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

मदद की देर और दर्दनाक अंत
दुर्घटना के बाद तीनों घायल करीब आधे घंटे तक सड़क पर ही पड़े रहे। इस दौरान कोई भी स्थानीय वाहन रुककर मदद के लिए सामने नहीं आया। अंततः राहगीरों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पुष्पेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, क्योंकि उसके सिर और शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। जबकि योगेश को सिर और आंखों में गंभीर चोटें आई हैं, और अमित को भी कई जगह चोटें लगी हैं। दोनों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

पारिवारिक स्थिति और शोक
पुष्पेंद्र अहिरवार पुट्टी (सीमेंट निर्माण से संबंधित) का कार्य करते थे और मेहनत से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनके दो मासूम बेटियां हैं, जो अब पिता की छाया से वंचित हो गईं हैं।
परिजनों को जैसे ही दुर्घटना की जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में बीना अस्पताल पहुंचे। मृतक के बड़े भाई महेंद्र अहिरवार ने बताया कि पुष्पेंद्र मेहनती और शांत स्वभाव का व्यक्ति था।
पुलिस जांच और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने पर बीना पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक का शव पंचनामा कार्यवाही के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
फिलहाल पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है, जो हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। पास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है, जिससे वाहन की पहचान की जा सके।

स्थानीय लोगों में रोष और चिंता
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है कि सड़क पर घायल लोग आधे घंटे तक पड़े रहे और किसी ने तत्काल मदद नहीं की। यह न केवल सामाजिक संवेदनहीनता को दर्शाता है, बल्कि 108 एंबुलेंस सेवा की तत्परता पर भी सवाल उठाता है।
इसके अलावा, खुरई रोड पर तेज रफ्तार वाहनों और रोशनी की कमी को लेकर भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, परंतु कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

पुष्पेंद्र अहिरवार की असमय मौत ने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया और परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई है। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी को दर्शाता है — जहां दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन मदद करने वाला कोई नहीं होता।
पुलिस को चाहिए कि मामले की गहराई से जांच कर अज्ञात वाहन चालक को शीघ्र पकड़कर कानूनी कार्यवाही करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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