डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की अहम बैठक मंगलवार को वंदे मातरम के गान के साथ शुरू हो गई। इस बैठक में राज्य के प्रशासनिक, आर्थिक और विकास से जुड़े कुल 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति देने की संभावना है। कैबिनेट की इस बैठक को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कुछ बड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।
बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010 को वापस लेने के प्रस्ताव पर अनुमोदन है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो राज्य सरकार इस पुराने विधेयक को औपचारिक रूप से निरस्त कर देगी। यह निर्णय कानून व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग के बाद शेष बची 7.73 लाख मीट्रिक टन धान के ई-ऑक्शन के निराकरण पर भी चर्चा की जाएगी। सरकार इस धान के उचित निपटान और राजस्व प्रबंधन को लेकर निर्णय ले सकती है, जिससे भंडारण और वित्तीय बोझ कम किया जा सके।

वन विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक नए पद के सृजन को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। इससे विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक मजबूती आने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट कई अहम निर्णय ले सकती है। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में 134 पीजी सीटों की वृद्धि से संबंधित निर्माण कार्यों को कार्योत्तर स्वीकृति देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे राज्य में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में इजाफा होगा। वहीं श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के विस्तार को भी पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दिए जाने की संभावना है।
सिंचाई और कृषि क्षेत्र के लिए लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय मंजूरी देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखा गया है। इस परियोजना से किसानों को सिंचाई सुविधाओं में सुधार मिलेगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े कई प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हैं। इनमें सोलहवें वित्त आयोग की अवधि तक विभिन्न योजनाओं—जैसे सड़क मरम्मत, भवनों की मरम्मत, भू-अर्जन मुआवजा और जिला मार्गों के नवीनीकरण—को जारी रखने की स्वीकृति दी जाएगी। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को निरंतरता मिलेगी।
इसके अलावा न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़े प्रस्ताव भी कैबिनेट में रखे गए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर कुछ मामलों में कर्मचारियों को पेंशन और वेतनमान देने की मंजूरी दी जा सकती है। इनमें शकूर खान और संजय कुमार गुप्ता सहित अन्य याचिकाओं से जुड़े मामले शामिल हैं।

सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्तावों में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास योजना को जारी रखने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह योजना दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे मध्य प्रदेश के ओबीसी छात्रों के लिए संचालित है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में रखा गया है।
बैठक से पहले एक खास पल भी देखने को मिला, जब मंत्रिपरिषद की महिला सदस्यों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिनंदन किया। यह अभिनंदन उनके द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के संकल्प के लिए किया गया।
कुल मिलाकर, यह कैबिनेट बैठक राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई अहम फैसलों की दिशा तय कर सकती है। अब नजर इस बात पर है कि इन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद राज्य में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।