पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने अपने जन्मदिन को केवल एक व्यक्तिगत उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जनसेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण बना दिया। उन्होंने अपने जन्मदिवस पर आयोजित चार दिवसीय रक्तदान शिविर के माध्यम से समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता और सहभागिता की नई मिसाल कायम की। इस आयोजन में 1612 यूनिट रक्त एकत्र कर तीन प्रमुख ब्लड बैंकों को समर्पित किया गया। यह शिविर मात्र एक समारोह नहीं, बल्कि जीवनदायिनी सामाजिक क्रांति का प्रतीक बन गया।
उद्घाटन एवं प्रेरणा:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सागर विभाग संघचालक डॉ. जीएस चौबे ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि श्री भूपेन्द्र सिंह ने रक्तदान के क्षेत्र में देश का सबसे ऊंचा स्ट्राइक रेट हासिल किया है। उन्होंने बताया कि भूपेन्द्र भैया का यह प्रयास केवल रक्त संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समरसता, सेवा और जागरूकता का संदेश भी देता है।
डॉ. चौबे ने कहा कि देश में केवल 0.8% लोग रक्तदान करते हैं, जबकि कई देशों में यह आंकड़ा 100% तक है। उन्होंने सुझाया कि “भविष्य के रक्तदाता” कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों को रक्तदान शिविरों में ले जाकर इस अभियान को भविष्य तक मजबूत किया जाए।
भूपेन्द्र सिंह का उद्बोधन:
पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने अपने भाषण में कहा कि वह उन 13112 रक्तदाताओं से खून का रिश्ता मानते हैं जिन्होंने पिछले दस वर्षों में उनके आह्वान पर रक्तदान किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत दस वर्ष पूर्व हुई थी जब उन्होंने अपने जन्मदिन को फिजूलखर्ची और दिखावे के बजाय सेवा का माध्यम बनाने का संकल्प लिया था।
उन्होंने कहा,
“आज मुझे गर्व है कि हम इस अभियान को समाज का अभियान बना चुके हैं। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसमें हर जाति, धर्म, दल और वर्ग के लोग सहभागी हैं।”
स्वास्थ्य और जागरूकता का संगम:
डॉ. चौबे और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित रक्तदान से न केवल दूसरों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि यह रक्तदाता के लिए भी स्वास्थ्य लाभदायक होता है:
त्वचा युवा बनी रहती है
कैंसर और दिल की बीमारियों का खतरा घटता है
इम्युनिटी बेहतर होती है
अतिरिक्त आयरन का नियंत्रण होता है
विशेष योगदान:
महिला सहभागिता: इस बार 53 महिलाओं ने रक्तदान किया, जो कि महिला सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि है।
ग्रामीण क्षेत्र से भागीदारी: दूर-दराज के जिलों से लोग रक्तदान करने आए, जो भूपेन्द्र सिंह के प्रभाव और जनसमर्थन को दर्शाता है।
रक्तदान के सामाजिक लाभ: इस रक्त से एनीमिया पीड़ित गर्भवती महिलाओं को उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जो अक्सर रक्त की कमी के कारण जीवन के जोखिम में होती हैं।
संस्थागत समर्थन और आयोजन:
रक्त संग्रह का नेतृत्व संतोष दुबे की अध्यक्षता में शिविर आयोजन समिति ने किया।
अजय तिवारी देवलचौरी के नेतृत्व में रक्तदाताओं का स्वागत और सम्मान किया गया।
अविराज सिंह ने कार्यक्रम का आभार व्यक्त किया।
महापौर श्रीमती संगीता तिवारी और प्रतिनिधि डॉ. सुशील तिवारी ने भूपेन्द्र सिंह के जनकल्याणकारी दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
समाजसेवा का अनुपम उदाहरण:
पूर्व मंत्री श्री सिंह ने अपने जन्मदिवस को जनसेवा में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
“आज जो रक्त एकत्र हुआ है, वह भोपाल, खुरई और सागर के अस्पतालों में घूमता रहेगा और किसी जरूरतमंद की जान बचाने में मदद करेगा। यह किसी फूल, केक या पटाखे से अधिक मूल्यवान है।”
सम्मान और अभिवादन:
कार्यक्रम के दौरान श्री सिंह का तुलादान, शाल-श्रीफल, स्मृति चिन्हों, और अभिनंदन पत्रों से सम्मान किया गया। गरीब बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित की गई।
भूपेन्द्र सिंह द्वारा आयोजित यह रक्तदान शिविर न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारत भर में रक्तदान अभियानों के लिए एक प्रेरक आदर्श बन गया है। यह कार्यक्रम राजनीति से परे, समाज के हित में, और मानवता की सेवा में समर्पित रहा। यह साबित करता है कि अगर राजनेता चाहें तो वे अपनी लोकप्रियता को लोककल्याण में बदल सकते हैं।