बीना। समर्थन मूल्य पर हो रही खरीदी में अनियमितताओं और कथित अवैध वसूली से नाराज किसानों ने बीना क्षेत्र में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। गोहर स्थित खरीदी केंद्र पर व्यवस्थाओं से असंतुष्ट किसानों ने मंडीबामौरा-निर्तला मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब पांच घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्र पर उनकी उपज की तुलाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। दूर-दराज के गांवों से अपनी फसल लेकर आए किसान कई दिनों से खुले आसमान के नीचे इंतजार करने को मजबूर हैं। किसानों ने बताया कि उनकी ट्रालियां चार से पांच दिनों से लाइन में खड़ी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी बारी नहीं आ रही है। इसके विपरीत, कुछ किसानों की उपज को ‘सेटिंग’ के जरिए प्राथमिकता देकर पहले तौला जा रहा है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खरीदी केंद्र पर प्रत्येक ट्राली से 500 से लेकर 1000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। उनका कहना है कि बिना पैसे दिए उनकी उपज की तुलाई नहीं की जाती, जिससे आर्थिक रूप से पहले से परेशान किसान और अधिक संकट में आ रहे हैं। इस कथित भ्रष्टाचार से आक्रोशित किसानों ने सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चक्काजाम कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और अधिकारियों की लापरवाही पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। इससे किसानों का भरोसा शासन की योजनाओं से उठता जा रहा है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब किसानों ने वेयरहाउस संचालक पर अभद्रता करने और उन्हें परिसर से बाहर निकालने की धमकी देने का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि जब उन्होंने अपनी समस्याएं रखीं, तो उन्हें सुनने के बजाय अपमानित किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और अंततः चक्काजाम का निर्णय लिया गया।
इस बीच, यह भी सामने आया कि जिस वेयरहाउस में खरीदी हो रही है, वह एक स्थानीय भाजपा नेता पूरन सिंह रघुवंशी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन किसानों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

चक्काजाम की सूचना मिलते ही आगासौद थाना प्रभारी नितिन पाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों का दल भी मौके पर पहुंचा, जिसमें बीना तहसीलदार अंबर पंथी, नायब तहसीलदार रतिराम अहिरवार, मंडी बामौरा चौकी प्रभारी, आरआई और पटवारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया कि खरीदी केंद्र पर हो रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया गया कि तुलाई प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना चक्काजाम समाप्त कर दिया और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।

हालांकि, किसानों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि खरीदी केंद्रों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों का आक्रोश और बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में और बड़े आंदोलन हो सकते हैं। फिलहाल, प्रशासन की कार्रवाई और जांच के परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।