वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे देश और विश्व के साथ शहर में भी आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित “गृह-गृह गायत्री यज्ञ” अभियान ने एक बार फिर समाज में आध्यात्मिक जागरण की अलख जगाई। सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चले इस महाअभियान में शहर के करीब 4000 घरों में एक साथ यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें 12 हजार से अधिक साधकों ने विधिवत हवन कर आहुतियां दीं।
यह आयोजन अपने सातवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और हर वर्ष इसकी भव्यता और जनभागीदारी में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, राष्ट्रीय एकता और मानव चेतना को जागृत करना है। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ यज्ञ कर अपने-अपने घरों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। गायत्री मंत्र की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। हवन सामग्री और विधि पत्रक का वितरण पहले ही कर दिया गया था, ताकि हर परिवार आसानी से यज्ञ कर सके। प्रत्येक वार्ड में एक-एक जिम्मेदार कार्यकर्ता नियुक्त किया गया, जिन्होंने घर-घर जाकर लोगों को इस आयोजन से जोड़ा। सबसे खास बात यह रही कि सभी सामग्री निशुल्क वितरित की गई, जिससे समाज के हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो सकी।
इस अवसर पर शहर में लगभग 4 घंटे के भीतर 4 क्विंटल से अधिक हवन सामग्री का उपयोग किया गया, जो इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाता है। पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर हवन सामग्री के पैकेट तैयार किए और उन्हें घर-घर पहुंचाया। इस सामूहिक प्रयास ने न केवल आयोजन को सफल बनाया, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत किया।

गायत्री परिवार के ट्रस्टी अखिलेश पाठक के अनुसार, इस बार यह आयोजन वैश्विक स्तर पर ऐतिहासिक रहा। देश-विदेश में लगभग 2.50 करोड़ स्थानों पर एक साथ यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया। यह संख्या इस अभियान की लोकप्रियता और प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। शहर में भी हर वार्ड और मोहल्ले में इसकी व्यापक तैयारियां की गई थीं, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सके।
इस पूरे अभियान की प्रेरणा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य से प्राप्त होती है, जिन्होंने वैदिक संस्कृति के पुनरुत्थान और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए गायत्री परिवार की नींव रखी। उनके द्वारा प्रारंभ किया गया यह यज्ञ अभियान आज एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जो लोगों को आध्यात्मिकता और संस्कारों से जोड़ रहा है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि सामूहिक यज्ञ से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। साथ ही, यह प्राकृतिक वातावरण को भी शुद्ध करने में सहायक होता है। यज्ञ के दौरान उच्चारित मंत्रों और अग्नि में डाली गई आहुतियों से एक विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता को बढ़ावा देती है।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि समाज एकजुट होकर किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए कार्य करे, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। वैशाख पूर्णिमा के इस पावन दिन पर आयोजित यह महाअभियान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रेरणादायक साबित हुआ।