छतरपुर में नाली में फंसे बैल का रेस्क्यू: ड्रिलर से तोड़ना पड़ा स्लैब, नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप !

Spread the love

मध्यप्रदेश के छतरपुर शहर में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक बैल संकरी और गहरी नाली में गिरकर फंस गया। कई घंटों तक छटपटाते रहे इस बेजुबान जानवर को आखिरकार स्थानीय लोगों और गौसेवकों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में नगर पालिका की अनुपस्थिति ने लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

घटना शहर की एक संकरी गली की है, जहां अचानक एक बैल गहरी नाली में जा गिरा। नाली इतनी संकरी थी कि बैल खुद बाहर निकलने में पूरी तरह असमर्थ था। वह बार-बार उठने और बाहर आने की कोशिश करता रहा, लेकिन हर बार असफल रहा। उसके लगातार छटपटाने से आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और उसे बचाने की कोशिश शुरू की गई।

शुरुआत में स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर बैल को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन जगह कम होने और नाली की गहराई अधिक होने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद हरिओम गौशाला की टीम को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही गौशाला के सदस्य मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

रेस्क्यू टीम ने स्थिति का आकलन करने के बाद निर्णय लिया कि बैल को सुरक्षित निकालने के लिए नाली के ऊपर बने कंक्रीट स्लैब को तोड़ना जरूरी है। इसके लिए ड्रिलर मशीन मंगाई गई और सावधानीपूर्वक स्लैब को तोड़ा गया। इसके बाद रस्सियों और अन्य स्थानीय संसाधनों की मदद से बैल को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। यह पूरी प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरी थी, लेकिन टीम के धैर्य और प्रयास से आखिरकार बैल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

हालांकि इस हादसे में बैल को कुछ चोटें आई थीं, लेकिन तुरंत प्राथमिक उपचार किया गया और उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों ने गौशाला टीम के इस प्रयास की सराहना की और इसे एक सराहनीय कार्य बताया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर पालिका के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिला। लोगों का आरोप है कि घटना की सूचना तुरंत नगरपालिका और संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। नागरिकों का कहना है कि शहर में आवारा पशुओं के नाम पर हर साल लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।

लोगों का यह भी कहना है कि यदि समय पर नगर पालिका की ओर से मदद मिल जाती, तो बैल को इतनी परेशानी और चोटों का सामना नहीं करना पड़ता। इस घटना ने एक बार फिर नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह कोई पहली घटना नहीं है जब शहर में आवारा पशु इस तरह हादसों का शिकार हुए हों। इससे पहले भी कई बार पशुओं के नालियों, गड्ढों या सड़कों पर घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

इस घटना के बाद नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में आवारा पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान, उचित देखभाल और निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही, नालियों और खतरनाक स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कुल मिलाकर, छतरपुर की यह घटना केवल एक बैल के रेस्क्यू की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमी को उजागर करने वाला एक उदाहरण भी है। जहां एक ओर गौसेवकों और स्थानीय लोगों ने मिलकर एक जान बचाई, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभाग की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में क्या कदम उठाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *