सागर संभाग में निर्माण कार्यों की समीक्षा: स्कूलों में समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने के निर्देश !

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सागर
सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले छह जिलों में संचालित शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार, सागर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के अपर संचालक डॉ. मनीष वर्मा ने की। इस दौरान उन्होंने समग्र शिक्षा अभियान और पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

बैठक में संयुक्त संचालक एस.पी. सिंह बिसेन, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन, दमोह के जिला शिक्षा अधिकारी सुनील नेमा सहित सहायक संचालक एम. कुमार, मनीषा अलेक्जेंडर, आशुतोष गोस्वामी, संभागीय आईटी समन्वयक शुभम तिवारी और संभाग के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, एडीपीसी, सहायक यंत्री, उपयंत्री एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक न केवल समीक्षा तक सीमित रही, बल्कि इसमें भविष्य की कार्ययोजना और क्रियान्वयन की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान प्रत्येक जिले द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति प्रस्तुत की गई। इसमें समग्र शिक्षा अभियान और पीएम श्री योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन भवनों, अतिरिक्त कक्षों, प्रयोगशालाओं, शौचालयों, पेयजल सुविधाओं एवं अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों का विवरण फोटो सहित दिखाया गया। साथ ही, शाला भवनों के मरम्मत कार्यों की प्रगति भी साझा की गई।

समीक्षा करते हुए डॉ. वर्मा ने सत्र 2022-23 से लेकर 2025-26 तक स्वीकृत सभी निर्माण कार्यों की गहन निगरानी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि जिला एवं विकासखंड स्तर पर अधिकारी नियमित रूप से साइट निरीक्षण करें और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाने चाहिए।

डॉ. वर्मा ने निर्माण एजेंसियों जैसे पीआईयू (Project Implementation Unit) और आरईएस (Rural Engineering Services) के साथ समन्वय बनाकर कार्यों में आ रही बाधाओं को शीघ्र दूर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी परियोजना में तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनें हैं, तो संबंधित अधिकारी तुरंत उच्च स्तर पर जानकारी देकर समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाओं जैसे आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासरूम और इंटरैक्टिव पैनल की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाए। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि हो सके।

इसके पूर्व, भोपाल से सागर आते समय डॉ. वर्मा ने विदिशा जिले के शासकीय हाईस्कूल वन और शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल मनौरा का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में चल रहे भवन मरम्मत कार्यों, आईसीटी लैब की स्थापना, स्मार्ट क्लास की व्यवस्था और इंटरैक्टिव पैनल के इंस्टॉलेशन का जायजा लिया। साथ ही, कक्षा 10वीं और 12वीं के उन विद्यार्थियों के लिए संचालित विशेष कक्षाओं का भी अवलोकन किया, जो द्वितीय अवसर (second chance) के अंतर्गत परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान डॉ. वर्मा ने शिक्षकों और अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ शिक्षण पद्धति और संसाधनों का प्रभावी उपयोग भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों के बेहतर परिणामों के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी।

बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि सभी जिलों में निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

इस समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि शासन शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यदि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले समय में सागर संभाग के विद्यालयों में शिक्षा का स्तर और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक हो सकेगा।

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