तौल पर्ची समय बढ़ा, किसानों को राहत: 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी, भुगतान 6490 करोड़ पार !

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मध्यप्रदेश में गेहूँ उपार्जन व्यवस्था को और अधिक किसान हितैषी बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार सुधार कर रही है। इसी कड़ी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में गेहूँ खरीदी का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिल चुका है।

मंत्री श्री राजपूत के अनुसार, अब तक 7 लाख 48 हजार किसानों से 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। यह आंकड़ा न केवल सरकार की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि किसानों के भरोसे और सहभागिता को भी मजबूत करता है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तौल पर्ची बनाने का समय बढ़ाकर शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक कर दिया है। साथ ही देयक (पेमेंट) जारी करने की समय-सीमा भी बढ़ाकर रात 12 बजे तक कर दी गई है, जिससे किसानों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।

उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब तक 14 लाख 75 हजार किसानों ने गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए हैं, जो इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को दर्शाता है। किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उपार्जन अवधि को 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक कर दिया गया है, ताकि कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रह जाए।

प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर व्यवस्थाओं को और मजबूत किया गया है। पहले जहां तौल कांटों की संख्या 4 थी, उसे बढ़ाकर 6 कर दिया गया है। इतना ही नहीं, जिलों को आवश्यकता अनुसार तौल कांटों की संख्या बढ़ाने का अधिकार भी दे दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। इसके अलावा एनआईसी सर्वर की क्षमता और संख्या में वृद्धि की गई है, ताकि स्लॉट बुकिंग और डेटा प्रबंधन में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।

खाद्य विभाग द्वारा हर घंटे स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित बनी रहे। किसानों को समय पर भुगतान भी सरकार की प्राथमिकता है। अब तक किसानों को 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है।

उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पीने के पानी की व्यवस्था, छायादार बैठने की जगह, शौचालय और अन्य जन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही तौल प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल-तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

गुणवत्ता परीक्षण के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे किसानों की उपज का सही मूल्यांकन हो सके। साथ ही उपज की साफ-सफाई के लिए पंखे और छन्ने जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं। उपार्जन केंद्रों पर उपलब्ध सभी सुविधाओं के फोटो भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और केंद्रों की निगरानी भी बेहतर तरीके से हो सके।

किसानों को उनके गेहूँ का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य तय किया है। इस वर्ष गेहूँ का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है। यह दर किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

भंडारण की दृष्टि से भी सरकार ने व्यापक तैयारी की है। उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जूट के बारदानों के साथ-साथ पीपी और एचडीपी बैग का उपयोग किया जा रहा है, जिससे गेहूँ की गुणवत्ता बनी रहे और नुकसान से बचा जा सके।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गेहूँ उपार्जन को लेकर किए गए ये सुधार और व्यवस्थाएं किसानों के लिए राहत भरी साबित हो रही हैं। समय में बढ़ोतरी, सुविधाओं का विस्तार और पारदर्शी प्रणाली ने उपार्जन प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और प्रभावी बना दिया है। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था और भी बेहतर होगी, जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सकेगा।

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