सागर। जिले के श्रद्धालुओं के लिए एक बार फिर धार्मिक यात्रा का सुनहरा अवसर सामने आया है। मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत इस वर्ष विभिन्न पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इस बार वैष्णो देवी–अमृतसर तथा हरिद्वार–ऋषिकेश यात्राओं का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया गया है, जिससे जिले के पात्र नागरिकों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर प्राप्त होगा।
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वैष्णोदेवी-अमृतसर यात्रा के लिए कुल 262 यात्रियों का चयन किया जाएगा। इस यात्रा के लिए आवेदन पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि 07 मई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि संभावित यात्रा प्रारंभ तिथि 17 मई 2026 तय की गई है। इसी प्रकार हरिद्वार-ऋषिकेश यात्रा के लिए 196 यात्रियों का चयन किया जाएगा, जिसके लिए आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 05 जुलाई 2026 और संभावित यात्रा प्रारंभ तिथि 19 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक एवं पात्र आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेजों में चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड प्रमुख रूप से शामिल हैं। आवेदन पत्रों की विधिवत जांच के बाद ही पात्र हितग्राहियों का चयन किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत यह विशेष ध्यान रखा जाएगा कि ऐसे व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाए, जिन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का लाभ प्राप्त नहीं किया है। इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समयावधि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों पर किसी भी प्रकार से विचार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद वर्ग के नागरिकों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना आर्थिक बोझ के अपनी आस्था को पूर्ण कर सकें। यह योजना सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्था को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है।
जिला प्रशासन ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं और समय पर आवेदन कर अपने लिए इस धार्मिक यात्रा को सुनिश्चित करें। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का माध्यम बनेगी, बल्कि उन्हें देश की सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का कार्य करेगी।