छतरपुर जनसुनवाई में छावनी जैसी सुरक्षा:बैग और जरूरी फाइलें ले जाने पर भी रोक !

Spread the love

छतरपुर। छतरपुर जिले में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर इस मंच का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर यहां लागू की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है।

जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई स्थल को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है। फरियादियों को अपने बैग, पर्स और यहां तक कि जरूरी दस्तावेजों की फाइल भी अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कई स्तर की सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही लोगों को अधिकारियों तक पहुंचने दिया जा रहा है।

स्थल पर दर्जनों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें वर्दीधारी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी शामिल हैं। पहले मुख्य गेट पर जांच होती है, फिर कक्ष के बाहर और अंदर भी अलग-अलग स्तर पर चेकिंग की जाती है। हालात ऐसे हैं कि अधिकारियों तक पहुंचने से पहले सुरक्षाकर्मी ही लोगों से उनकी समस्या पूछते हैं और उसके बाद ही उन्हें आगे जाने की अनुमति मिलती है।

इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जो दूर-दराज के गांवों से अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं। कई फरियादियों ने बताया कि उनके आवेदन और जरूरी दस्तावेज फाइल में होते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर उन्हें भी बाहर रखवा लिया जाता है। इससे न केवल असुविधा हो रही है, बल्कि अपनी समस्या ठीक से प्रस्तुत करने में भी कठिनाई आ रही है।

महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है। लंबी दूरी तय कर आने के बाद जब उन्हें बार-बार जांच और रोक-टोक का सामना करना पड़ता है, तो वे खुद को असहज और हताश महसूस करते हैं। जनसुनवाई जैसी व्यवस्था, जो आमजन के लिए राहत का माध्यम होनी चाहिए, वहां इस तरह की सख्ती लोगों के अनुभव को नकारात्मक बना रही है।

इस पूरे मामले पर जब एसडीएम Prashant Agrawal से सवाल किया गया, तो उनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने कहा, “ये आप मुझसे क्यों पूछ रहे हैं? जिले में पूछिए जो व्यवस्था बना रहे हैं। मैं अंदर रहता हूं, कितने लोग तैनात हैं, मैंने गिने थोड़ी हैं।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सुरक्षा व्यवस्था इसलिए कड़ी रखी गई है क्योंकि “कोई कुछ भी लेकर पहुंच जाता है।” इसके बाद उन्होंने बातचीत को बीच में ही टाल दिया।

वहीं, इस मुद्दे पर जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई। Parth Jaiswal (कलेक्टर) और Namah Shivay Arjariya (जिला पंचायत सीईओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि आमजन को असुविधा न हो। जनसुनवाई का मूल उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना है, ऐसे में अत्यधिक सख्ती इस उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुविधा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण मंच पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *