सागर। एडीना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा महाकवि पद्माकर सभागार में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में युवा ऊर्जा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण का संदेश गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए युवा नेता अविराज सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना देश की युवा शक्ति ही साकार करेगी। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा वर्ग आने वाले समय में राष्ट्र को आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में अविराज सिंह ने कहा कि युवा होने का अर्थ केवल कम आयु नहीं, बल्कि अपने हुनर पर विश्वास, अपनी मिट्टी पर गर्व और अपनी मेहनत पर भरोसा होना है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अनुशासन, सकारात्मक सोच और जागरूकता के साथ आगे बढ़ें तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने कहा कि युवावस्था में किया गया परिश्रम ही भविष्य की सफलता और सम्मान की मजबूत नींव बनता है। आज का समय युवाओं के लिए अमृतकाल है, जहां अवसरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलेगी जो निरंतर सीखने की आदत और मेहनत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे।
अविराज सिंह ने कहा कि वास्तविक युवा वही है जो अनीति का विरोध करे, दुर्गुणों से दूर रहे और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता रखता हो। उन्होंने कहा कि केवल बातें करने से नहीं, बल्कि कार्य करके दिखाने से पहचान बनती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिनेश के. त्रिपाठी ने भी विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि युवा ही इसके अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और कई बार दर्शक भी होंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि अवसर पैदा करने वाले बनें। वर्तमान समय को ‘जेन-जी’ का युग बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी तकनीक और डिजिटल दुनिया के साथ बड़ी हुई है। यही कारण है कि इसे ‘डिजिटल नेटिव’ कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत में जेन-जी की आबादी लगभग 37 करोड़ से अधिक है और यह देश की कुल आबादी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा है। यह वर्ग देश के उपभोक्ता खर्च का लगभग 43 प्रतिशत नियंत्रित करता है। यदि यही युवा शक्ति नवाचार, स्टार्टअप, रिसर्च और तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़े तो भारत को विश्व नेतृत्व से कोई नहीं रोक सकता।
कार्यक्रम में अविराज सिंह ने युवाओं को ‘इनोवेशन’ और ‘अपस्किलिंग’ का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि आज केवल डिग्री सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने की क्षमता ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है। डिग्री आपको इंटरव्यू तक पहुंचा सकती है, लेकिन मेहनत, कौशल और अपडेटेड ज्ञान ही सफलता के शिखर तक ले जाता है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान हर दो-तीन वर्षों में बदल रहा है और भविष्य की नौकरियों के लिए नए कौशल आवश्यक होंगे। इसलिए युवाओं को नई तकनीकों, डिजिटल स्किल्स और उद्यमिता को अपनाना होगा।
भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। हजारों युवा अपनी प्रतिभा के दम पर वैश्विक पहचान बना रहे हैं। उन्होंने रितेश अग्रवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में छोटे स्तर से शुरुआत कर वैश्विक कंपनी खड़ी कर दी।

अविराज सिंह ने कहा कि आने वाले समय में सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, बायोटेक, डिफेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, ई-कॉमर्स, फिनटेक और एडटेक जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं से ‘इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस और प्रॉस्पर’ के मंत्र को अपनाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका उपयोग केवल दिखावे या दूसरों की स्वीकृति पाने के लिए नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग ज्ञान, शिक्षा, नवाचार और सकारात्मक कंटेंट निर्माण के लिए होना चाहिए।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि फिल्मों और सोशल मीडिया के माध्यम से नशे को आधुनिकता और स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो युवाओं के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि खाली दिमाग बहुत जल्दी नशे की ओर आकर्षित होता है, इसलिए युवाओं को अपनी ऊर्जा खेल, संगीत, लेखन, पेंटिंग, कोडिंग और समाज सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि असली हीरो वह नहीं है जो दिखावे में जीता है, बल्कि वह है जो अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
अविराज सिंह ने विद्यार्थियों को महान व्यक्तियों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि संघर्ष और सफलता की कहानियां जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र आत्ममूल्यांकन है और प्रत्येक युवा को प्रतिदिन स्वयं का आकलन करना चाहिए।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि चरित्र निर्माण संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए भी स्वयं को समर्पित करें।
कार्यक्रम में एडीना मैनेजमेंट के डॉ. सुनील कुमार जैन, राजेश जैन, रोहित जैन, सुयश जैन, इंजीनियरिंग कॉलेज एवं फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य, समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।