सागर के 7 गांव बनेंगे ‘वृंदावन ग्राम’, प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भरता पर रहेगा फोकस !

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सागर। प्रतिभा पाल ने शासन की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना’ के अंतर्गत चयनित गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ विस्तृत कार्ययोजना बनाकर चयनित गांवों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करें। साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक किया जाए, ताकि गांव आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।

यह निर्देश कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने वृंदावन ग्राम योजना की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के. वी., कृषि विभाग के उप संचालक राजेश त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा सागर जिले के सात गांवों का चयन वृंदावन ग्राम योजना के लिए किया गया है। इन गांवों को समग्र ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। चयनित गांवों में सागर का पड़रिया, सुरखी का मोकलपुर, देवरी का खाकरिया, शाहगढ़ का बारहटा, बीना का देहरी, मालथौन का रोडा तथा रहली का ताल सेमरा ग्राम शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास की नई अवधारणा स्थापित करना है। योजना के तहत गौपालन, दुग्ध उत्पादन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, चारागाह विकास, ग्रामीण उद्यमिता और अवसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जाएगा।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि चयनित गांवों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि वे अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन सकें। इन गांवों में स्वच्छता, हरियाली, गौसेवा, आध्यात्मिकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ते हुए “वृंदावन” की अवधारणा को साकार किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीणों को प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।

योजना के अंतर्गत गांवों में छह प्रमुख श्रेणियों में सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इनमें गौशाला, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, यात्री आश्रय स्थल, सौर स्ट्रीट लाइट, पुस्तकालय, कौशल विकास केंद्र और पशु चिकित्सालय जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। इसके अलावा गांवों में आंतरिक सड़कें, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें, गोदाम और प्रत्येक घर तक सौर ऊर्जा आधारित पाइपलाइन जल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

कलेक्टर ने बताया कि वृंदावन ग्रामों में बायोगैस संयंत्र, श्मशान घाट (शांतिधाम), गौ स्मारक, कचरा पृथक्करण शेड, जल निकासी व्यवस्था और कृत्रिम गर्भाधान केंद्र जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। साथ ही जलवायु अनुकूल आवास, सार्वजनिक उद्यान, सार्वजनिक शौचालय, सिंचाई स्रोत और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का भी विस्तार किया जाएगा।

रोजगार और आजीविका सृजन के लिए भी योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत नंदन फलोद्यान, पोषण वाटिका, दुग्ध संग्रहण केंद्र, कृषि एवं फल आधारित उद्योग, लघु वन उत्पाद आधारित गतिविधियां तथा कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे जैसी गतिविधियों को भी योजना का हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़ सके।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि जल संरक्षण योजना का प्रमुख हिस्सा होगा। इसके लिए वर्षा जल संचयन, छतों से जल संचयन, ट्यूबवेल रिचार्ज, चेकडैम निर्माण और तालाब संरक्षण जैसे कार्य किए जाएंगे। साथ ही ई-पंचायत और सीएससी सेवाएं भी गांवों तक पहुंचाई जाएंगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चयनित गांवों में अगले 15 दिनों के भीतर सर्वे कार्य पूरा किया जाए और योजनावार पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार की जाए, ताकि पात्र ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि गांवों के कम से कम 50 प्रतिशत कृषि रकबे को प्राकृतिक खेती की ओर ले जाने के लिए किसानों को प्रशिक्षित और जागरूक किया जाए। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।

कलेक्टर ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के. वी. को वृंदावन ग्राम योजना का नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए निर्देश दिए कि चयनित गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर जल्द कार्य प्रारंभ किया जाए।

जिला प्रशासन का मानना है कि मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के माध्यम से चयनित गांवों में न केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता के जरिए गांव आत्मनिर्भर बनेंगे तथा ग्रामीणों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।

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