सागर। माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, ममता, संघर्ष और समर्पण का जीवंत स्वरूप होती है। मदर्स डे के अवसर पर सागर जिले की प्रगणक Sangeeta Thakur ने अपने कर्तव्य और मातृत्व के अद्भुत संतुलन से समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। गोद में नन्हा बच्चा और हाथों में जनगणना का जिम्मा लेकर वे भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच घर-घर जाकर राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।
सागर तहसील के ग्राम मुहली स्थित एचएलबी क्रमांक-58 में प्रगणक के रूप में कार्यरत संगीता ठाकुर इन दिनों जनगणना महाअभियान में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जुटी हुई हैं। विशेष बात यह है कि वे अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर गांव-गांव और घर-घर पहुंच रही हैं। एक ओर मातृत्व की जिम्मेदारी और दूसरी ओर राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण कार्य में योगदान—दोनों को जिस संतुलन और धैर्य के साथ वे निभा रही हैं, वह हर किसी के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।
गर्मी के इस मौसम में जहां तेज धूप और उमस आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, वहीं संगीता ठाकुर बिना थके लगातार अपने कार्य में लगी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबी दूरी तय करना, घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना और डिजिटल माध्यम से डेटा दर्ज करना आसान काम नहीं है, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को मुस्कुराते हुए स्वीकार किया है।

जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा है। उनके प्रगणक ब्लॉक एचएलबी-58 में अब तक लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। संगीता ठाकुर ने विश्वास जताया है कि अगले दो दिनों में वे शेष कार्य भी पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पूर्ण कर लेंगी।
संगीता ठाकुर का कहना है कि राष्ट्र सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण अभियान में अपनी भूमिका निभाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एक माँ होने के नाते बच्चे की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन देश के प्रति कर्तव्य भी उतना ही जरूरी है। इसी भावना के साथ वे दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चल रही हैं।
ग्रामीणों ने भी उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की है। गांव के लोगों का कहना है कि जिस तरह संगीता ठाकुर अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर भी पूरी लगन से कार्य कर रही हैं, वह वास्तव में प्रेरणादायी है। कई महिलाओं ने उन्हें “नारी शक्ति” की मिसाल बताया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी संगीता ठाकुर के कार्य की प्रशंसा की है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना जैसे बड़े अभियान की सफलता ऐसे ही समर्पित कर्मचारियों की मेहनत पर निर्भर करती है। विपरीत परिस्थितियों में भी जिस जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ वे कार्य कर रही हैं, वह अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा है।
मदर्स डे के अवसर पर संगीता ठाकुर की यह कहानी समाज को यह संदेश देती है कि भारतीय महिलाएं हर परिस्थिति में परिवार और राष्ट्र दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाने में सक्षम हैं। कठिन परिस्थितियां, मौसम की मार और शारीरिक थकान भी उनके साहस और समर्पण को कमजोर नहीं कर पातीं।
संगीता ठाकुर जैसी माताएं यह साबित करती हैं कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उनका संघर्ष, मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो चुनौतियों के सामने हार मान लेते हैं। मदर्स डे पर उनकी यह कहानी हर माँ के समर्पण और शक्ति को नमन करने का अवसर बन गई है।