सागर। सर्वधर्म कौमी एकता, भाईचारे और इंसानियत के प्रतीक हजरत सैयद दाऊद मक्की चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से “पीली कोठी वाले बाबा” के नाम से जानते हैं, का 76वां तीन दिवसीय सालाना उर्स 15 मई से 17 मई तक श्रद्धा, अकीदत और पारंपरिक सूफियाना माहौल के बीच आयोजित किया जाएगा। उर्स को लेकर दरगाह परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। आयोजन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है।
उर्स कमेटी के अध्यक्ष अरशद अली ने बताया कि इस वर्ष उर्स को भव्य और व्यवस्थित रूप से आयोजित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। दरगाह परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कमेटी सदस्यों और स्वयंसेवकों को सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि उर्स की शुरुआत 15 मई को जुमे की नमाज के बाद संदली चादर पेश करने की रस्म से होगी। इस दौरान अकीदतमंद दरगाह पर चादर और फूल पेश कर बाबा की दरगाह में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगेंगे। रात में मीलाद शरीफ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सूफी संतों की शिक्षाओं और इंसानियत के संदेश पर प्रकाश डाला जाएगा।

उर्स के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण सूफियाना कव्वाली मुकाबले रहेंगे। 16 मई की रात मशहूर जुनैद सुल्तानी कव्वाल पार्टी और असद निशहद साबरी कव्वाल पार्टी के बीच शानदार मुकाबला होगा। दोनों कव्वाल पार्टियां अपने सूफियाना कलाम, हम्द, नात और मनकबत से महफिल को रूहानी रंग में रंग देंगी।
वहीं 17 मई की रात चांद कादरी कव्वाल पार्टी और शब्बीर सदाकत साबरी कव्वाल पार्टी अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर देंगी। आयोजकों का कहना है कि इस बार कव्वाली मुकाबलों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। देर रात तक चलने वाली इन महफिलों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
उर्स के दौरान दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मेले जैसा वातावरण रहेगा। बाजारों में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजेंगी, जहां खानपान, इत्र, चादर, धार्मिक सामग्री और सजावटी वस्तुओं की खरीदारी की जा सकेगी। बच्चों और युवाओं के लिए भी विशेष आकर्षण रहेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए देग और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की जा रही है। कमेटी द्वारा साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन स्थल पर आने वाले जायरीन को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
उर्स कमेटी के सदस्य अरशद अयूब, शहबाज खान सहित अन्य सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। कमेटी का कहना है कि यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और कौमी एकता का प्रतीक है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ शामिल होकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं।
पीली कोठी वाले बाबा की दरगाह वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र रही है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं और बाबा की दरगाह से दुआएं मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई दुआ यहां जरूर कबूल होती है। यही कारण है कि हर वर्ष उर्स में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
उर्स के दौरान प्रशासनिक सहयोग भी लिया जा रहा है। यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अमला भी आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सक्रिय रहेगा।
सागर शहर में आयोजित होने वाला यह उर्स धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी बड़ा प्रतीक माना जाता है। सूफी परंपरा, कव्वाली और आध्यात्मिक माहौल से सजा यह आयोजन आने वाले दिनों में शहरवासियों और जायरीन के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।