धोड़न बांध आंदोलन में पहुंचे जीतू पटवारी, विस्थापितों के समर्थन में सरकार पर बोला हमला !

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खजुराहो/पन्ना। जीतू पटवारी मंगलवार को पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के आंदोलन स्थल धोड़न बांध पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान आंदोलन स्थल पर भावनात्मक और तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई की मांग को लेकर डटे रहे।

ग्रामीण महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक अमित भटनागर रिहा नहीं किए जाते, वे न तो आंदोलन स्थल छोड़ेंगी और न ही अन्न-जल ग्रहण करेंगी। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना था कि उन्हें किसी राजनीतिक भाषण से ज्यादा अपने नेता की रिहाई चाहिए।

प्रशासन ने रोका, फिर भी आंदोलन स्थल पहुंचे पटवारी

जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे जीतू पटवारी धोड़न बांध निर्माण स्थल की ओर रवाना हुए। लेकिन पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में प्रवेश से पहले पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने वन्यजीव सुरक्षा और प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देते हुए गेट पर बैरिकेडिंग कर दी थी।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने चेतावनी दी कि यदि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करेंगे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इसके बावजूद जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेड पार कर आंदोलन स्थल तक पहुंचे।

इस दौरान उन्होंने कहा कि वे जनता की आवाज उठाने आए हैं और यदि आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए सौ बार जेल भी जाना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

“भाजपा सत्ता के लिए आदिवासियों की जिंदगी तबाह कर रही”

आंदोलन स्थल पर मीडिया से चर्चा करते हुए जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को केन-बेतवा लिंक परियोजना का ठेका दिया गया है, वही कंपनी भाजपा का करोड़ों रुपए का कार्यालय भी बना रही है।

उन्होंने कहा कि सत्ता के ऐशो-आराम के लिए आदिवासियों की जमीन, जंगल और जीवन छीनने का काम किया जा रहा है। पटवारी ने कहा कि विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने मांग की कि परियोजना से प्रभावित परिवारों को “मकान के बदले मकान” और “जमीन के बदले जमीन” दी जाए। साथ ही विस्थापितों के पुनर्वास की स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए।

अमित भटनागर की गिरफ्तारी बना आंदोलन का केंद्र

इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर की गिरफ्तारी बन चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए उन्हें हिरासत में लिया है।

ग्रामीण महिलाओं ने आंदोलन स्थल पर साफ कहा कि जब तक अमित भटनागर वापस नहीं आते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

शीला आदिवासी निवासी पलकुआ ने कहा कि “जीतू पटवारी आए, लेकिन हमें सिर्फ अमित भाई साहब चाहिए। उन्होंने पेड़-पौधों की बात की, लेकिन हमें न्याय नहीं मिला। हमारे लिए सबसे जरूरी अमित भाई साहब की रिहाई है।”

वहीं मुन्नी आदिवासी ने कहा कि “हमारी पहली और आखिरी मांग अमित भाई साहब को बाहर निकालने की है। जब तक वे नहीं आएंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे और अन्न-पानी भी ग्रहण नहीं करेंगे।”

ग्रामीणों के इस स्पष्ट रुख से साफ है कि आंदोलन अब केवल विस्थापन का नहीं बल्कि नेतृत्व और सम्मान का मुद्दा भी बन चुका है।

कलावती आदिवासी का विरोध बना चर्चा का केंद्र

आंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया खरियानी निवासी कलावती आदिवासी ने। वे तपती धूप में सांकेतिक अर्थी पर लेटकर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं।

कलावती ने कहा कि वे यहीं मर जाएंगी लेकिन तब तक आंदोलन स्थल नहीं छोड़ेंगी जब तक अमित भटनागर रिहा नहीं होते और कोई वरिष्ठ अधिकारी आकर उनकी बात नहीं सुनता।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें कूलर, पंखा या सरकारी सुविधाएं नहीं चाहिएं, बल्कि अपने अधिकारों और न्याय की जरूरत है।

जीतू पटवारी और कांग्रेस नेताओं ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि वे इतनी गर्मी में अपनी जान जोखिम में न डालें, लेकिन कलावती अपनी मांगों पर अडिग रहीं।

कांग्रेस ने दिया आंदोलन को समर्थन

जीतू पटवारी ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई में कांग्रेस आदिवासियों का साथ नहीं छोड़ेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ रही है, जबकि पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। पटवारी ने कहा कि यदि सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

धोड़न क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात

जीतू पटवारी के दौरे और लगातार बढ़ते आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने धोड़न और पलकोहा क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया है। प्रवेश द्वारों पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम निगरानी कर रही है।

दरअसल, धोड़न बांध पर केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले कई दिनों से “चिता आंदोलन” चल रहा है। आंदोलनकारी सांकेतिक चिताओं पर लेटकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन और घर प्रभावित होंगे, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास की गारंटी नहीं दी जा रही है।

प्रशासन की बढ़ी चिंता

लगातार उग्र होते आंदोलन और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। आंदोलनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आसपास के गांवों से भी लोग समर्थन में पहुंच रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और अमित भटनागर की रिहाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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