दमोह: जिले के पथरिया जनपद पंचायत कार्यालय में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब जनपद सदस्य कालूराम पटेल निरीक्षण के लिए अचानक कार्यालय पहुंचे। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जिससे जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई।

जानकारी के अनुसार, जनपद सदस्य जब कार्यालय पहुंचे तो कई कक्ष खाली पाए गए और किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की मौजूदगी नहीं थी। इसके बाद जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि खरगराम पटेल भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने भी पूरे कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण में कृषि विभाग से जुड़े कक्ष में केवल दो कर्मचारी मौजूद पाए गए, जबकि अन्य स्थानों पर सन्नाटा पसरा रहा।
जनपद सदस्य कालूराम पटेल ने आरोप लगाया कि यह स्थिति पहली बार नहीं है, बल्कि अक्सर कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जनसमस्याओं को लेकर जब लोग कार्यालय आते हैं तो उन्हें वापस लौटना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों के काम प्रभावित होते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब इस संबंध में जनपद सीईओ को फोन लगाया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है और इससे विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
जनपद सदस्य ने बताया कि इस मुद्दे को पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्रीय मंत्री तक पहुंचाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि तीन दिन पहले उन्होंने स्थानीय विधायक और मंत्री लखन पटेल को भी इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा।
निरीक्षण के दौरान जनपद कार्यालय का संचालन करने वाला चपरासी भी अनुपस्थित मिला, जिससे व्यवस्था पर और सवाल खड़े हो गए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि कार्यालय ही समय पर नहीं खुलेगा तो आम जनता के काम कैसे पूरे होंगे।

जनपद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि खरगराम पटेल ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने मांग की कि इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाए और सभी कर्मचारियों की उपस्थिति को अनिवार्य किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस तरह की अनियमितताओं पर तुरंत नियंत्रण करना चाहिए।
इस घटना के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी समय पर मौजूद रहेंगे तो ही विकास कार्यों और जनसेवाओं में सुधार संभव है।