मध्यप्रदेश में जंगलों के विकास और वन प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित होने वाली वन विभाग की रीजनल वर्कशॉप को अचानक इंदौर से भोपाल स्थानांतरित कर दिया गया है। पहले यह कार्यशाला 15 मई को इंदौर के एक फाइव स्टार कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की जानी थी, लेकिन बुधवार को वन विभाग ने संशोधित आदेश जारी करते हुए कार्यक्रम का स्थान बदल दिया।
अब यह कार्यशाला भोपाल स्थित वन मुख्यालय के 50 सीटर हॉल में आयोजित होगी। कार्यक्रम में प्रदेश के सभी वन मंडलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे और अपने-अपने क्षेत्रों से प्रजेंटेशन देंगे।
मुख्यमंत्री की अपील के बाद बदला निर्णय
वन विभाग द्वारा जारी संशोधित आदेश में बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर की गई अपील के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। सरकार सार्वजनिक परिवहन और संसाधनों के सीमित उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी के चलते बड़े स्तर पर अधिकारियों की यात्रा को कम करने के उद्देश्य से इंदौर में प्रस्तावित आयोजन को निरस्त कर ऑनलाइन मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
अब प्रदेश के सभी डीएफओ और वन अधिकारी अपने-अपने मुख्यालयों में रहकर ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भोपाल में आयोजित कार्यशाला से जुड़ेंगे।

विकास शाखा करा रही थी आयोजन
यह कार्यशाला मध्यप्रदेश वन विभाग की विकास शाखा द्वारा आयोजित की जा रही थी। विभागीय जानकारी के अनुसार इस शाखा के प्रमुख पीसीसीएफ पुरुषोत्तम धीमान हैं, जो 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं और आगामी 31 मई को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
उनकी सेवानिवृत्ति से लगभग 15 दिन पहले आयोजित होने वाली इस कार्यशाला को विभाग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि 4 मई को प्रदेश के सभी आईएफएस अधिकारियों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सूचना भेज दी गई थी और इंदौर में इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं।
हालांकि अचानक कार्यक्रम का प्रारूप बदलने से विभागीय हलकों में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
जंगलों के विकास सहित कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
वन विभाग की इस कार्यशाला में प्रदेश के जंगलों के संरक्षण, विकास और वन प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी।
कार्यशाला में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है, उनमें शामिल हैं—
- वनों का विकास और संरक्षण
- ग्रीन इंडिया मिशन
- बांस मिशन
- वन्य प्राणी सुरक्षा
- कैम्पा से जुड़े कार्य
- वर्किंग प्लान
- वन उत्पादन
- वित्त एवं बजट प्रबंधन
- मानव संसाधन विकास
- अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी
- लघु वनोपज प्रबंधन
- ईको-पर्यटन
- सतर्कता शिकायतें
- भू-प्रबंधन एवं वन प्रशासन
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश में चल रही वन विकास योजनाओं की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीति तय करना है।
डिजिटल माध्यम से होगा प्रजेंटेशन
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के विभिन्न वन मंडलों के अधिकारी अपने-अपने जिलों से ऑनलाइन माध्यम से प्रजेंटेशन देंगे। इससे यात्रा में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम होंगे। विभाग का मानना है कि डिजिटल माध्यम से भी कार्यशाला को प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सकता है।
हालांकि कुछ अधिकारियों का मानना है कि प्रत्यक्ष बैठकों में संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर अधिक बेहतर रहता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और शासन की मंशा को देखते हुए ऑनलाइन व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण और संसाधन बचत पर सरकार का जोर
राज्य सरकार इन दिनों ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और ईंधन बचत की अपील के बाद कई विभागों ने अपने कार्यक्रमों और बैठकों के स्वरूप में बदलाव शुरू कर दिए हैं।
वन विभाग की यह कार्यशाला भी उसी दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जंगलों और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा करने वाले विभाग द्वारा ईंधन बचत और संसाधन संरक्षण की दिशा में पहल करना एक सकारात्मक संदेश है।