सागर जिले के शाहपुर में अवैध शराब बेचने के संदेह में दो लोगों की हत्या के बाद भड़के विरोध प्रदर्शन का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ द्वारा शराब दुकान में आग लगाए जाने और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता किए जाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इसी क्रम में अधिवक्ता जगमोहन लोधी को गिरफ्तार किए जाने के बाद अधिवक्ताओं और ओबीसी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि अधिवक्ता जगमोहन लोधी की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं लोधी समाज के लोग थाने पहुंच गए। गुरुवार सुबह अधिवक्ताओं की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें अधिवक्ता पर दर्ज एफआईआर का विरोध करते हुए उसे निरस्त करने की मांग उठाई गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच किए बिना कार्रवाई की जा रही है, जिससे समाज और अधिवक्ता वर्ग में आक्रोश है।
इधर, मामले को लेकर ओबीसी क्रांति सेना समेत ओबीसी वर्ग के कई लोग भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया और एसपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए बेरिकेटिंग की गई। प्रदर्शनकारियों को मुख्य गेट पर रोक दिया गया तथा प्रतिनिधिमंडल के रूप में 10 लोगों को अंदर भेजा गया।

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शाहपुर मामले में निर्दोष लोगों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने, निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की गई। एसपी अनुराग सुजानिया ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला 8 मई की रात शाहपुर क्षेत्र में हुई हिंसक घटना से जुड़ा हुआ है। फरियादी सूरज अहिरवार उम्र 40 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 7 शाहपुर ने 9 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, शराब बेचने के संदेह को लेकर आरोपियों ने सूरज अहिरवार और नीरज प्रजापति का रास्ता रोककर गाली-गलौज की और उनके साथ मारपीट की।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी नीलेश अहिरवार, भगवत पटेल, अंशुल यादव, हर्ष सिंह लोधी एवं अभिषेक पटेल ने लाठी और लोहे की रॉड से हमला किया। मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुए नीरज प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि घायल सूरज अहिरवार बेहोशी की हालत में मिला था। इलाज के दौरान 10 मई को सूरज अहिरवार की भी मृत्यु हो गई।

दो युवकों की मौत के बाद शाहपुर क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने शराब दुकान में आग लगा दी थी और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की घटनाएं भी सामने आई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 40 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
अब अधिवक्ता जगमोहन लोधी की गिरफ्तारी के बाद यह मामला नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। अधिवक्ता संघ और ओबीसी संगठनों द्वारा लगातार विरोध जताया जा रहा है। न्यायालय परिसर में भी अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
शाहपुर की यह घटना अब केवल आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील होती जा रही है। प्रशासन की चुनौती एक ओर हत्या के आरोपियों पर कार्रवाई करना है, तो दूसरी ओर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और प्रशासन की ओर से क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।