छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में रेप पीड़िता को 5 घंटे इंतजार: मेडिकल जांच के लिए डॉक्टर नहीं पहुंचीं, पुलिस भी परेशान रही !

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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल से संवेदनशील मामलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाने के बाद पुलिस और पीड़िता को करीब पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को कई बार सूचना देने के बावजूद वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंचीं।

इस दौरान पीड़िता अस्पताल परिसर में परेशान होती रही और पुलिस स्टाफ भी लगातार डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश करता रहा। घटना के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में मेडिकल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिश्ते के चाचा पर दुष्कर्म का आरोप

पुलिस के अनुसार पीड़िता ने शिकायत में बताया कि बुधवार रात वह गांव से खेत में बने घर की ओर जा रही थी। इसी दौरान रिश्ते में लगने वाले चाचा ने रास्ता रोक लिया और उसके साथ जबरदस्ती करते हुए दुष्कर्म किया।

घटना के बाद महिला गुरुवार सुबह अपने पति के साथ पुलिस के पास पहुंची। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने नियमानुसार मेडिकल परीक्षण कराने के लिए पीड़िता को जिला अस्पताल भेजा।

दोपहर से शाम तक अस्पताल में इंतजार

जानकारी के मुताबिक सावरी चौकी पुलिस गुरुवार दोपहर करीब 1:37 बजे पीड़िता को लेकर छिंदवाड़ा जिला अस्पताल पहुंची थी। यहां मेडिकल लीगल जांच (MLC) के लिए ड्यूटी डॉक्टर निकिता शेख को सूचना दी गई।

आरोप है कि कई बार फोन करने और स्थिति बताने के बावजूद डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचीं। इस दौरान पीड़िता, महिला पुलिसकर्मी और अन्य स्टाफ घंटों तक अस्पताल में इंतजार करते रहे।

“आपके हिसाब से काम थोड़ी करूंगी”

पुलिस स्टाफ के मुताबिक डॉक्टर को बार-बार कॉल कर मामले की गंभीरता बताई गई, लेकिन कथित तौर पर डॉक्टर ने फोन पर नाराजगी जताते हुए कहा —
“क्या पीड़िता को मुझसे पूछकर लाए हैं?”
और
“तुम्हारे हिसाब से काम थोड़ी करूंगी।”

इन कथित बयानों के बाद पुलिस स्टाफ ने मामले की जानकारी वरिष्ठ डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को भी दी, लेकिन तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी।

5 घंटे बाद पहुंचीं डॉक्टर, फिर चली गई बिजली

करीब पांच घंटे के लंबे इंतजार के बाद शाम लगभग 6:20 बजे डॉक्टर अस्पताल पहुंचीं। लेकिन इसी दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई, जिससे मेडिकल जांच प्रक्रिया में और देरी हो गई।

बताया जा रहा है कि पीड़िता करीब 40 किलोमीटर दूर इलाके से जिला अस्पताल लाई गई थी। उसके साथ लावाघोघरी थाने की एएसआई उषा जावरकर भी मौजूद थीं।

पुलिस अधिकारी ने बताई पूरी स्थिति

एएसआई उषा जावरकर ने बताया कि पीड़िता की शिकायत बुधवार को दर्ज की गई थी और गुरुवार को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल लाया गया था।

उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन को पहले से जानकारी दे दी गई थी, लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचीं। पुलिस और पीड़िता को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

डॉक्टर ने दी तबीयत खराब होने की सफाई

मामले में डॉक्टर निकिता शेख ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और उन्होंने पहले ही अस्पताल स्टाफ को आने में असमर्थता की जानकारी दे दी थी।

हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ड्यूटी डॉक्टर उपलब्ध नहीं थीं, तो इतने संवेदनशील मामले में वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था तत्काल क्यों नहीं की गई।

अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही

घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन सुशील दुबे ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है।

उन्होंने बताया कि घटना की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

संवेदनशील मामलों में लापरवाही पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि दुष्कर्म जैसे मामलों में मेडिकल जांच बेहद महत्वपूर्ण और समयबद्ध प्रक्रिया होती है। देरी होने पर न केवल पीड़िता को मानसिक परेशानी होती है, बल्कि जांच और सबूतों पर भी असर पड़ सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में संवेदनशील मामलों को लेकर तैयारियों और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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