मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सागर में चला जनजागरूकता रथ, सांसद एवं स्वास्थ्य अधिकारियों ने दिखाई हरी झंडी !

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सागर, 01 जून 2025 – मलेरिया जैसी घातक बीमारी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज सागर जिले में “मलेरिया जन-जागरूकता रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। मलेरिया कार्यालय परिसर से इस रथ को सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन, सीएमएचओ डॉ. ममता तीमोरी एवं जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया ने संयुक्त रूप से रवाना किया। यह रथ आगामी 25 जून तक जिले के सभी विकासखंडों व मलेरिया प्रभावित ग्रामों में भ्रमण कर आमजन को मलेरिया के लक्षण, उससे बचाव तथा उपचार संबंधी जानकारी देने का कार्य करेगा।

इस अवसर पर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी व स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिनमें सहायक मलेरिया अधिकारी राज बहादुर, मलेरिया सुपरवाइजर विशाखा रोहित और राम कुमार तिवारी, प्रभारी एमआई श्री शेषनारायण गौतम, रेखा अहिरवार, आशा सुपरवाइजर दर्शना, आशा कार्यकर्ता हरिबाई कुर्मी, पार्वती कुर्मी और भवानी राठौर प्रमुख रूप से शामिल थे। रथ के माध्यम से माइकिंग, पोस्टर व प्रदर्शन सामग्रियों द्वारा जनसाधारण को मलेरिया से बचने के उपायों के प्रति सतर्क किया जाएगा।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया ने बताया कि मलेरिया रथ का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी के प्रति चेतना उत्पन्न करना है ताकि समय रहते रोग की पहचान और उपचार संभव हो सके। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर 3.3 बिलियन लोग मलेरिया के खतरे की जद में हैं और हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। मादा एनाफिलीज मच्छर द्वारा फैलने वाले इस संक्रमण से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है।

डॉ. पटेरिया ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से दो प्रकार के मलेरिया पाए जाते हैं – प्लाजमोडियम वायवेक्स और प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम। इनमें से फैल्सीफेरम अधिक खतरनाक होता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा सिद्ध हो सकता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अंतर्गत 2027 तक मलेरिया उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रयास जारी हैं।

मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में निश्चित समय पर बुखार आना, सिर दर्द, मितली, कंपकंपी, बदन दर्द और कमजोरी शामिल हैं। इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग, घर के आसपास जलभराव की रोकथाम, रुके पानी में जला हुआ तेल या मिट्टी का तेल छिड़काव तथा खिड़की-दरवाजों में मच्छर जाली का प्रयोग आवश्यक है। बुखार की स्थिति में शीघ्रता से नजदीकी शासकीय अस्पताल या आशा कार्यकर्ता से संपर्क कर निःशुल्क जांच कराना चाहिए।

इस जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को जनसहयोग से हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया।

संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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