ललपुर खरीदी केंद्र में किसानों की भारी परेशानी: रसीद के लिए भटकाव, खुले में पड़ा गेहूं, पानी तक नहीं !

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खजुराहो। राजनगर तहसील के ललपुर गेहूं खरीदी केंद्र में किसानों को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र पर कई दिनों से तौल के बाद भी रसीद नहीं मिलने, खुले में अनाज पड़े रहने और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थिति ऐसी है कि किसान खुद बोरी भरने से लेकर अनाज की देखरेख तक करने को मजबूर हैं।

तौल के बाद भी नहीं मिल रही रसीद

केंद्र पर आए किसानों का आरोप है कि उनका गेहूं तौला जा चुका है, लेकिन कई दिनों से उन्हें रसीद नहीं दी जा रही है। इसके कारण वे न तो अपने भुगतान की स्थिति जान पा रहे हैं और न ही अनाज को आगे भेज पा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि रसीद के लिए उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं

खरीदी केंद्र पर हजारों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। बारिश या मौसम खराब होने की स्थिति में भारी नुकसान की आशंका बनी हुई है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई पुख्ता व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

किसानों का कहना है कि वे अपनी मेहनत की फसल को लेकर चिंतित हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं

केंद्र पर सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की बताई जा रही है। जिस भवन में पानी की सुविधा है, वहां अक्सर ताला लगा रहता है। किसानों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो एक व्यक्ति ने बाउंड्री कूदकर ताला खोला, जिससे व्यवस्था की पोल खुल गई।

मजदूरों की कमी से किसान खुद कर रहे काम

किसानों ने बताया कि मजदूरों की कमी के कारण उन्हें खुद ही बोरी भरने और अनाज लादने का काम करना पड़ रहा है। इस पर उन्हें कोई उचित भुगतान भी नहीं दिया जा रहा है।

कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्हें प्रति बोरी बेहद कम मजदूरी मिलती है, जिससे उनका गुजारा भी मुश्किल हो रहा है।

अतिरिक्त गेहूं और अनियमितताएं

किसानों का आरोप है कि तौल के समय उनसे प्रति क्विंटल अतिरिक्त गेहूं लिया जा रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि रसीद देने में देरी जानबूझकर की जा रही है और लोडिंग पूरी होने के बाद ही रसीद देने की बात कही जा रही है।

बारिश का खतरा, जिम्मेदारी किसान पर

किसानों के अनुसार जब उन्होंने खुले में पड़े गेहूं के नुकसान की चिंता जताई, तो उन्हें बताया गया कि किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं होगी, बल्कि किसानों की होगी। इससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

वाहन न आने से रुका उठान

केंद्र पर गेहूं के उठान के लिए वाहन न आने की वजह से काम पूरी तरह प्रभावित है। कई किसानों का अनाज लंबे समय से वहीं पड़ा हुआ है।

प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल

यह पूरा मामला प्रशासन के सुचारु व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार किसानों के हित की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।

किसानों में बढ़ता आक्रोश

अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

फिलहाल किसान अपनी उपज की सुरक्षा और रसीद की मांग को लेकर केंद्र के चक्कर काट रहे हैं और प्रशासनिक हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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