भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा आर्थिक हालात की बड़ी वजह केंद्र सरकार की नीतियां, नेतृत्व की कमी और दूरदर्शी सोच का अभाव है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता पर भारी पड़ रही है और इसका सीधा असर महंगाई, उद्योगों, किसानों और घरेलू बजट पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना
शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के साथ-साथ देश के भीतर भी आर्थिक संकट गहराया है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की नीतियों पर जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए, जिसके कारण जनता को महंगाई का बोझ झेलना पड़ रहा है।
“लीडरशिप क्राइसिस” का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर “लीडरशिप क्राइसिस” का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्णय लेने में देरी और रणनीतिक दृष्टि की कमी के कारण देश आर्थिक दबाव में है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष जैसे वैश्विक कारणों को लेकर सरकार ने शुरुआत में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया।
उनके अनुसार, सरकार ने जनता के सवालों को नजरअंदाज किया और समय रहते कोई ठोस नीति नहीं अपनाई।
संप्रभुता और विदेश नीति पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति और ऊर्जा नीति पर निर्भरता बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि कुछ फैसलों के कारण देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुमति या निर्भरता जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि उन्होंने इस बयान में किसी विशेष देश या समझौते का नाम विस्तार से नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा ऊर्जा खरीद और विदेश नीति से जुड़े फैसलों की ओर था।
सरकार से पूछे दो बड़े सवाल
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से दो प्रमुख सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि:
पहला सवाल यह है कि मार्च में रूसी तेल खरीद को लेकर जो समयसीमा दी गई थी, उस स्थिति में देश को क्यों लाया गया, जहां अब अनुमति या दबाव जैसी स्थिति बन रही है।
दूसरा सवाल यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम अपेक्षाकृत कम थे, तब सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय भारी टैक्स वसूली क्यों की। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में पेट्रोल-डीजल से जुड़े करों के जरिए सरकार ने लगभग 43 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर महंगाई और आर्थिक प्रबंधन को लेकर सवाल उठाती रही है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, टैक्स नीति और वैश्विक परिस्थितियों का मिलाजुला असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है, लेकिन इस पर राजनीतिक बहस हमेशा जारी रहती है।
दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने एक बार फिर देश की आर्थिक नीतियों और महंगाई को लेकर राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है। जहां विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अक्सर इसे वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक प्रबंधन का हिस्सा बताया जाता है।