सागर। विकासखंड राहतगढ़ की ग्राम पंचायत जरारा में कृषि रथ 2026-27 के माध्यम से किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विभागीय अधिकारियों से खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। इस दौरान ई-विकास प्रणाली अंतर्गत टोकन वितरण व्यवस्था, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा मृदा स्वास्थ्य परीक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सहायक संचालक कृषि नेहा सोहगौरा ने कृषि रथ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीकों और शासन की योजनाओं से जोड़ना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने नरवाई प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए किसानों से फसल अवशेषों को जलाने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि खेत की मिट्टी का परीक्षण कराकर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत कम होती है। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जे. एल. विश्वकर्मा ने किसानों को कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ फसल विविधीकरण अपनाना समय की आवश्यकता है। किसानों को दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती करने की सलाह देते हुए उन्होंने बताया कि इससे आय में वृद्धि की जा सकती है और खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को नई कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए। विविध फसलों की खेती से जोखिम कम होता है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
कार्यक्रम में कृषि विकास अधिकारी अंबुजा सिंह ने ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने किसानों को बताया कि ई-टोकन व्यवस्था के माध्यम से खाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाई जा रही है। इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा और लंबी कतारों व अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
उन्होंने किसानों को ई-टोकन प्राप्त करने और उसके उपयोग की पूरी प्रक्रिया भी समझाई, ताकि किसान आसानी से इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
एटीएम नीलगिरी जैन ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में रसायन मुक्त खेती की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग से कम लागत में बेहतर खेती की जा सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने कृषि विभाग की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। किसानों ने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने से उन्हें खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।
अंत में कृषि विकास अधिकारी अंबुजा सिंह ने सभी कृषकों का आभार व्यक्त किया और कृषि विभाग की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। कार्यक्रम का समापन किसानों को जागरूक, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषि की दिशा में प्रेरित करने के संदेश के साथ किया गया।