भोपाल/सागर, । जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज की पीड़ा को समझते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहल के माध्यम से जनजातीय समाज के जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाना है।
मंत्री डॉ. विजय शाह मंगलवार को भोपाल स्थित आदि भवन में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत “तकनीकी आधारित सतत जनजाति विकास अवधारणा” विषय पर आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह सहित प्रदेशभर से आए विभागीय अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि वे वर्ष 1990 से लगातार जनजातीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उन्होंने वनवासी समाज के बीच रहकर उनकी समस्याओं और जरूरतों को करीब से समझा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और वनवासी अंचलों में जाकर जनजातीय समाज के जीवन को नजदीक से देखें और प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर योजनाओं का क्रियान्वयन करें।
उन्होंने बताया कि जनजातीय वर्ग के लिए संचालित योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाने के उद्देश्य से “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के लोगों को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवार भी विकास की धारा से जुड़ें और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक की तुलना में आज जनजातीय समाज की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और अब यह समाज शिक्षा, रोजगार और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बोतलें वितरित की जा रही हैं। इसके अलावा पहली से बारहवीं तक के लगभग 45 हजार विद्यार्थियों को पेयजल के लिए पानी की बोतलें उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में वॉटर कूलर और आरओ सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके।
मंत्री डॉ. शाह ने जनजातीय छात्राओं की शिक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनवासी क्षेत्रों की कई बालिकाएं परिवहन सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने अपने क्षेत्र में प्रयोग के तौर पर चार बसों का संचालन शुरू कराया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया और कॉलेज जाने वाली छात्राओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए।

कार्यशाला में तकनीक आधारित विकास के विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनजातीय क्षेत्रों के विकास को नई गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाना संभव है।
कार्यशाला के पहले सत्र में मैनिट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संयम शुक्ला ने “आजीविका एवं रोजगार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जनजातीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर तैयार किए जा सकते हैं और स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।
वहीं आईआईएसईआर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने “सतत जनजातीय विकास में जीआईएस एवं उपग्रह सुदूर संवेदन” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तकनीक और भू-स्थानिक आंकड़ों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विकास कार्यों की बेहतर निगरानी और योजना निर्माण संभव है।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में ट्राइफेड की आईएएस अधिकारी श्रीमती प्रीति मैथिल ने “जनजातीय आजीविका एवं उद्यमिता विकास” विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों के पारंपरिक उत्पादों और कौशल को बाजार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।
इसके अलावा आईआईआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रज्योति देब ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय कृषि को बदल रहा है” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि एआई तकनीक खेती को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बना सकती है। वहीं डॉ. निखिल कुमार सिंह ने “स्वास्थ्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि एआई आधारित तकनीक ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं।