सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल की सख्त कार्यशैली और जनहित के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण एक बार फिर जिला मुख्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में देखने को मिला। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याओं को कलेक्टर ने गंभीरता से सुना और कई मामलों में मौके पर ही समाधान सुनिश्चित कराया। विशेष रूप से भूमि सीमांकन से जुड़े चार मामलों में तत्काल निर्णय लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि आगामी 26 मई 2026 तक हर हाल में सीमांकन की कार्रवाई पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
कलेक्टर प्रतिभा पाल के इस त्वरित निर्णय से लंबे समय से राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहे आवेदकों को बड़ी राहत मिली। जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी प्रशासन की इस संवेदनशील कार्यप्रणाली की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता को अपने वैधानिक अधिकारों और मूलभूत कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई नागरिक सीमांकन जैसी मूलभूत राजस्व प्रक्रिया के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहा है तो यह प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान तहसील जैसीनगर के अंतर्गत ग्राम टेकापार, सर्किल बिलहरा से पहुंचे आवेदक महेश कुमार मिश्र ने अपनी भूमि के सीमांकन का मामला कलेक्टर के समक्ष रखा। आवेदक ने बताया कि लंबे समय से सीमांकन नहीं होने के कारण उन्हें भूमि संबंधी विवादों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर उपस्थित एसएलआर और संबंधित राजस्व अधिकारियों से जानकारी ली तथा तत्काल सीमांकन कराने के निर्देश जारी कर दिए।

इसी प्रकार तहसील सागर ग्रामीण के ग्राम सिंगपुर, सर्किल परसोरिया निवासी गोपालप्रसाद ने भी अपनी भूमि सीमांकन की समस्या रखी। उन्होंने बताया कि कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने संबंधित तहसीलदार से जवाब तलब करते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा में सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जाए और रिपोर्ट सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रस्तुत की जाए।
जनसुनवाई में ग्राम चतुर्भता, सर्किल सुरखी निवासी श्रीमती रामरानी भी अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि सीमांकन नहीं होने के कारण उन्हें लगातार विवादों का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने महिला आवेदक की समस्या को गंभीरता से सुना और मौके पर ही सीमांकन की तारीख तय करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि महिलाओं और ग्रामीणों को राजस्व मामलों में अनावश्यक परेशान नहीं किया जाना चाहिए और प्रत्येक प्रकरण का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित होना चाहिए।
इसके अलावा तहसील बंडा के अंतर्गत ग्राम बिजरी, सर्किल बंडा निवासी अशोक सिंह भी सीमांकन की शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने बताया कि कई महीनों से सीमांकन की कार्रवाई लंबित है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि 26 मई 2026 को संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर सीमांकन की कार्रवाई पूरी करे।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जनसुनवाई में मौजूद एसएलआर (अधीक्षक भू-अभिलेख), संबंधित तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और हल्का पटवारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 26 मई को चारों प्रकरणों में सीमांकन की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करेगी और उसकी रिपोर्ट सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय को सौंपी जाएगी।
कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें देरी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मंगलवार को आयोजित इस साप्ताहिक जनसुनवाई में जिले के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। किसी ने राजस्व विवाद, किसी ने पेयजल, सड़क, विद्युत और आवास योजनाओं से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुना और मौके पर उपस्थित विभागीय अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक सक्रियता साफ दिखाई दी। विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे और कलेक्टर के निर्देश पर कई मामलों का तत्काल निराकरण भी किया गया। कई आवेदकों ने कहा कि उन्हें पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जा रहा है और तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई हो रही है।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास का माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक आवेदन को संवेदनशीलता के साथ लें और समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, न कि उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगवाना।
कलेक्टर के इस सख्त और संवेदनशील रवैये से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन अब जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए अधिक सक्रिय और जवाबदेह तरीके से कार्य कर रहा है। सीमांकन जैसे मामलों में मौके पर निर्णय लेकर समय-सीमा तय करने की पहल से आम नागरिकों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।