दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील पहल : सागर कलेक्ट्रेट में बनाई गई विशेष जनसुनवाई व्यवस्था !

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सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल एक बार फिर अपनी संवेदनशील कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। दिव्यांग भाई-बहनों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनने और उन्हें प्रशासनिक सेवाओं तक सहज पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट परिसर में विशेष व्यवस्था की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर अब जनसुनवाई में पहुंचने वाले दिव्यांगजनों के लिए अलग से सुविधाजनक कक्ष बनाया गया है, जहां उनकी समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर सुनी जा रही हैं।

कलेक्टर प्रतिभा पाल पहले ही शासकीय कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाने के निर्देश दे चुकी हैं। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। जनसुनवाई स्थल पर किसी दिव्यांग व्यक्ति के पहुंचते ही उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाती है तथा सहायक कर्मचारियों द्वारा उन्हें आसानी से विशेष कक्ष तक पहुंचाया जाता है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

कलेक्ट्रेट परिसर में बनाए गए इस विशेष कक्ष में कलेक्टर प्रतिभा पाल स्वयं पहुंचकर दिव्यांगजनों की समस्याएं सुनती हैं। वे प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देती हैं। इतना ही नहीं, महत्वपूर्ण मामलों को समय-सीमा के तहत मार्क भी किया जाता है, ताकि उनका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। किसी ने पेंशन, किसी ने प्रमाण पत्र, तो किसी ने आवास और उपचार सहायता से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एक-एक आवेदक की समस्या को संवेदनशीलता से सुना और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए।

जनसुनवाई में पहुंचे दिव्यांगजनों ने प्रशासन की इस नई व्यवस्था की सराहना की। उनका कहना था कि पहले उन्हें लंबी कतारों और भीड़ के बीच काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब अलग कक्ष और विशेष सहायता मिलने से उन्हें सम्मानजनक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिल रहा है।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए और किसी भी आवेदन को लंबित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व है कि समाज के हर वर्ग तक शासन की सुविधाएं समान रूप से पहुंचें, विशेषकर उन लोगों तक जिन्हें अतिरिक्त सहयोग और सहूलियत की आवश्यकता होती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों के लिए शासकीय भवनों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को पूरी तरह सुलभ बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके तहत रैंप, व्हीलचेयर, सुगम मार्ग और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

सागर कलेक्ट्रेट में शुरू की गई यह विशेष व्यवस्था न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण बन रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि शासन आमजन, विशेषकर दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है। जिला प्रशासन की इस पहल से दिव्यांगजनों में विश्वास और संतोष का माहौल देखने को मिल रहा है।

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