घुवारा/बमनौरा, छतरपुर, 3 जून 2025 —
छतरपुर जिले के बड़ामलहरा अनुविभाग के बमनौरा थाना क्षेत्र में इन दिनों अराजकता और अपराध बढ़ने से स्थानीय जनता के बीच असुरक्षा की भावना का माहौल बन गया है। बमनौरा थाना प्रभारी शिशिर तिवारी की लगातार लापरवाही और अव्यवस्था ने पुलिस प्रशासन की छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जहां एक ओर इलाके के लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर थाना प्रभारी की सुस्ती और अव्यवस्था ने अपराधियों को खुली छूट दे दी है।

शराबियों और गुंडों के बढ़ते हौसले, पुलिस नदारद
बमनौरा थाना क्षेत्र में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि शराबियों और गुंडों का हौसला बुलंद हो गया है। सोमवार को बमनौरा बस स्टैंड पर एक शराबी ने नग्न अवस्था में उत्पात मचाया। उसने महिलाओं को अपशब्द कहे, बच्चों को डराया, दुकानदारों को धमकाया और पूरे इलाके में बदतमीजी और गुंडई की। स्थानीय नागरिकों ने बार-बार बमनौरा थाना को सूचना दी, लेकिन न तो कोई पुलिसकर्मी आया और न ही कोई गश्त टीम मौके पर पहुँची। यह घटना पूरे दिन जारी रही, लेकिन थाना प्रभारी या उनके अधीनस्थों ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या यही है स्मार्ट पुलिसिंग और क्या यही है पुलिस का जनता के प्रति कर्तव्य?

चिरोला गांव में आग लगने पर भी थाना प्रभारी नदारद
हाल ही में रामटोरिया के पास स्थित चिरोला गांव में भीषण आग लगी थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों परिवारों के घर जलकर राख हो गए। लेकिन, इस मामले में भी थाना प्रभारी शिशिर तिवारी नदारद रहे। न तो उन्होंने पीड़ितों से संपर्क किया और न ही राहत कार्यों में कोई हिस्सा लिया। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या थाना प्रभारी को यह भी समझाना पड़ेगा कि जनता की जान-माल की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है?
थाना प्रभारी की कार्यशैली पर सवाल
शिशिर तिवारी की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है। उनके कार्यकाल के दौरान अपराध दर में लगातार वृद्धि हुई है, और न तो किसी असामाजिक तत्व के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है, न ही शराब माफियाओं पर कोई नकेल कसी गई है। इसके उलट, अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे खुलेआम गांवों में दहशत फैलाते हैं और पुलिस से बचकर निकल जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना प्रभारी जनता से मिलने तक का समय नहीं निकालते और यदि कोई पीड़ित शिकायत लेकर थाने जाता है तो उसे या तो टरका दिया जाता है या फिर निजी मनमर्जी से कार्रवाई की जाती है।

प्रशासन की मौन सहमति?
अब सवाल यह उठता है कि जब एक थाना प्रभारी पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था को बिगाड़ रहा है, तब जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक, आईजी, और गृह विभाग क्या कर रहे हैं? क्या किसी अफसर ने कभी जांच की कि थाना प्रभारी थाने में रहते भी हैं या नहीं? क्या किसी अधिकारी ने बमनौरा के हालात की ग्राउंड रिपोर्ट मंगाई है? और क्या दो मौतों और दर्जनों शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई जरूरी नहीं समझी गई?
यदि इन सवालों का उत्तर न है, तो इसका सीधा अर्थ है कि प्रशासन खुद इस अराजकता में मौन सहमति दे रहा है। बमनौरा की आम जनता अब शांत नहीं बैठने वाली है। क्षेत्रीय युवाओं, व्यापारियों, किसानों और महिलाओं में गहरा रोष और असुरक्षा की भावना है। लोग अब प्रशासन से सीधा सवाल पूछ रहे हैं: “क्या हमारे जीवन की कीमत कुछ नहीं है? क्या हमें गुंडों और शराबियों के हवाले छोड़ दिया गया है?”

जनता का आंदोलन तय?
बमनौरा की जनता अब प्रशासन से जवाब चाहती है और यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन का रूप ले सकता है। क्षेत्रीय जनता अब अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो चुकी है और अगर उचित कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट केवल बमनौरा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरा छतरपुर जिला बदनाम होगा और पुलिस से जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
प्रशासन का बयान
एडिशनल एसपी छतरपुर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, “मामला मेरे संज्ञान में आया है और मैंने तुरंत एसडीओपी से बात की है। पूरी घटनाक्रम की जांच करवाई जाएगी। जांच उपरांत जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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