ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में सागर जिले के 1000 मेडिकल स्टोर बंद, केमिस्टों ने काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन !

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Sagar जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। जिला केमिस्ट एसोसिएशन, जिला औषधि विक्रेता संघ और अन्य संगठनों के आह्वान पर जिलेभर के करीब 1000 मेडिकल स्टोर बंद रहे। हालांकि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नर्सिंग होम और अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रहे, जिससे इमरजेंसी दवाइयों की उपलब्धता बनी रही।

हड़ताल के दौरान दवा व्यापारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री को छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

जिलेभर में मेडिकल स्टोर रहे बंद

सुबह से ही सागर शहर सहित जिले के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद दिखाई दिए। सामान्य दिनों में जहां दवा दुकानों पर लोगों की भीड़ रहती है, वहीं बुधवार को अधिकतर मेडिकल दुकानें बंद रहीं।

हालांकि हड़ताल के बावजूद मरीजों को गंभीर परेशानी न हो, इसके लिए नर्सिंग होम और अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रखे गए थे। इमरजेंसी दवाइयां और जरूरी मेडिकल सेवाएं जारी रहीं।

दवा व्यापारियों का कहना था कि यह हड़ताल केवल सांकेतिक विरोध है और इसका उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।

काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मेडिकल संचालक और दवा व्यापारी शहर के तीनबत्ती क्षेत्र में एकत्र हुए। सभी ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा।

व्यापारियों का कहना था कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण पारंपरिक मेडिकल व्यवसाय लगातार प्रभावित हो रहा है और हजारों छोटे व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

“ऑनलाइन दवा बिक्री स्वास्थ्य के लिए खतरा”

जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष Ashok Kumar Jain ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध डॉक्टर की सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयों की होम डिलीवरी कर रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।

उनका कहना था कि कई बार मरीज बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाइयां मंगवा लेते हैं, जिससे गलत दवा सेवन और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का हवाला

जिला औषधि विक्रेता संघ के सचिव Anil Kumar Jain ने कहा कि वर्तमान में लागू ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

इसके बावजूद कई ई-फार्मेसी कंपनियां वर्षों से ऑनलाइन दवा बिक्री कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों लाइसेंसधारी केमिस्ट इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं।

उनका कहना था कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए छोटे व्यापारियों को बाजार से बाहर करने की कोशिश कर रही हैं।

सरकार से रखीं कई मांगें

दवा व्यापारियों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगाने, बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवा बिक्री बंद करने और अवैध ई-फार्मेसी पर कार्रवाई करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा व्यापारियों ने जीएसआर 220 (ई) और जीएसआर 817 (ई) को वापस लेने की मांग भी की। उनका कहना है कि इन प्रावधानों से छोटे दवा व्यापारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने प्रीडेटरी प्राइसिंग के खिलाफ सख्त नीति बनाने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं।

छोटे व्यापारियों पर आर्थिक संकट

दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के कारण छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार लगातार घट रहा है।

ग्रामीण और छोटे शहरों में संचालित मेडिकल स्टोर स्थानीय लोगों को तत्काल दवा उपलब्ध कराते हैं और कई बार जरूरतमंद मरीजों को उधार तक दवा देते हैं। लेकिन ऑनलाइन बिक्री बढ़ने से इन दुकानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

व्यापारियों ने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने उचित नीति नहीं बनाई तो हजारों छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

मरीजों को राहत देने की कोशिश

हड़ताल के बावजूद दवा व्यापारियों ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि मरीजों को गंभीर परेशानी न हो। इसी कारण नर्सिंग होम और अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रखे गए।

कई मेडिकल संचालकों ने पहले से ही मरीजों को जरूरी दवाइयां उपलब्ध करा दी थीं ताकि उन्हें अचानक समस्या का सामना न करना पड़े।

हालांकि सामान्य मरीजों को दिनभर कई स्थानों पर बंद मेडिकल स्टोरों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

रैली के बाद दवा व्यापारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट और सख्त कानून बनाए।

व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है।

देशभर में उठ रही मांग

ऑनलाइन दवा बिक्री का मुद्दा केवल सागर या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के कई राज्यों में दवा व्यापारी संगठन लंबे समय से ई-फार्मेसी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

दवा व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दवा बिक्री के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था जरूरी है ताकि मरीजों की सुरक्षा और पारंपरिक दवा व्यवसाय दोनों सुरक्षित रह सकें।

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