पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह के जन्मदिवस पर सेवा और संस्कार से जुड़े कार्यक्रम, सीताराम रसोई में कराया भोजन
सागर। पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक भूपेन्द्र सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर उनके पुत्र युवा नेता अविराज सिंह द्वारा सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान सीताराम रसोई में जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया गया तथा शिव मंदिर भूतेश्वर में पूजा-अर्चना कर समाज की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, मित्र, सहयोगी और नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अविराज सिंह ने अन्नदान और भारतीय संस्कृति में भोजन के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है, क्योंकि यह किसी भूखे व्यक्ति की तत्काल सहायता करता है और उसके प्राणों की रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि धन, वस्त्र या अन्य वस्तुएं भविष्य में काम आती हैं, लेकिन भोजन ऐसा दान है जो तुरंत तृप्ति और जीवन का आधार प्रदान करता है।

अविराज सिंह ने कहा कि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। जब कोई व्यक्ति जरूरतमंद को भोजन कराता है, तो उसके भीतर विनम्रता, संवेदनशीलता और सेवा का भाव उत्पन्न होता है। यह एहसास होता है कि हम केवल ईश्वर द्वारा दिए गए अन्न को समाज में बांटने का माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि भूख कभी धर्म, जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति नहीं देखती। इसलिए अन्नदान सामाजिक समरसता और मानव समानता का सबसे बड़ा माध्यम है। भारतीय संस्कृति में भोजन को ईश्वर का स्वरूप माना गया है। उपनिषदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “अन्नं वै प्राणः” अर्थात अन्न ही प्राण है और “अन्नं ब्रह्म” यानी अन्न ही ईश्वर है।
अविराज सिंह ने कहा कि शास्त्रों में मनुष्य की भूख को ‘जठराग्नि’ कहा गया है और किसी भूखे को भोजन कराना यज्ञ में आहुति देने से भी बड़ा पुण्यकारी कार्य माना गया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की ‘पंचबलि’ परंपरा का भी उल्लेख किया, जिसमें गौ, श्वान, पक्षियों, चींटियों और अतिथियों के लिए भोजन निकालने की परंपरा रही है। उन्होंने इसे सनातन संस्कृति की करुणा, संवेदनशीलता और समरसता का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि अन्नदान ऐसा दान है, जिसमें दान लेने वाला स्वयं तृप्त होकर आशीर्वाद देता है। भोजन के बाद किसी जरूरतमंद के चेहरे पर आने वाली संतुष्टि और मुस्कान न केवल उसे, बल्कि भोजन कराने वाले व्यक्ति को भी आत्मिक सुख प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह सिद्ध हो चुका है कि दूसरों को भोजन कराने से सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं और तनाव तथा अवसाद में कमी आती है।
अविराज सिंह ने भोजन की बर्बादी को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज समाज में एक ओर लोग भोजन के अभाव से जूझ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर आयोजनों में बड़ी मात्रा में भोजन नष्ट हो रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति का दायित्व है कि वह भोजन का सम्मान करे और जरूरतमंदों तक उसे पहुंचाने का प्रयास करे।
उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद का उल्लेख करते हुए कहा कि “अन्नं न निन्द्यात, अन्नं बहु कुर्वीत” अर्थात अन्न का कभी अपमान नहीं करना चाहिए और अधिक से अधिक अन्नदान करना चाहिए। भगवद्गीता और भविष्य पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रों में अन्नदान को तीर्थयात्रा और कठिन तपस्या के समान पुण्यकारी बताया गया है।
कार्यक्रम के दौरान सीताराम रसोई में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया। वहीं भूतेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर समाज में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई। पूरा कार्यक्रम सेवा, संस्कार और सामाजिक सद्भाव के वातावरण से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम में महेश साहू, अजय तिवारी, अतुल नेमा, शुभम घोषी, प्रतीक चैकसे, नीरज ठाकुर, संदीप साहू, आशीष जोशी, अंकित विश्वकर्मा, मोहित साहू, देवू सेन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।