मालथौन, 3 जून 2025 —
धर्म के मार्ग पर चलकर ही जीवन में सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है। समाज में जब तक धर्म के अनुरूप आचरण रहेगा, तब तक जीवन में कोई कष्ट नहीं होगा। यह उद्गार पूर्व गृहमंत्री और खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने श्रीराम महायज्ञ और श्री राम कथा के आयोजन में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन मालथौन के श्री केसरी मंदिर बगौनिया में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी उपस्थित थे।

श्री भूपेन्द्र सिंह का संबोधन
अपने संबोधन में भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सभी हिन्दू धर्म ग्रंथ जैसे श्रीमद्भागवत, शिव पुराण, और रामचरित मानस एक ही संदेश देते हैं — मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। धर्म का अनुसरण करने से ही समाज में शांति और समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि आजकल समाज में धीरे-धीरे धर्म के अनुकूल आचरण कम हो रहा है, और यही कष्टों का कारण बनता है।
भूपेन्द्र सिंह ने आगे कहा कि जैसे जैसे धर्म से हम दूर होते जाएंगे, हमारे जीवन में कष्ट बढ़ेंगे। उन्होंने अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि एक माँ का धर्म अपने बच्चे को संस्कार देना है। जब बच्चा माँ के पेट में होता है, तो वह पहले से ही संस्कारित होना शुरू हो जाता है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चे को अच्छे संस्कार देने के लिए धर्म की बातें सुनें, धार्मिक किताबें पढ़ें और भक्ति भाव से ईश्वर की आराधना करें।

श्रीराम कथा का महत्व
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि श्री राम कथा हमें जीवन की मर्यादाओं और नैतिक मूल्यों को समझाती है। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। रामचरित मानस में एक पुत्र, एक भाई, एक पति और एक पत्नी के रूप में मर्यादाओं का चित्रण किया गया है, जो हमें धर्म, न्याय और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में जो मर्यादाएं निभाईं, वह सभी के लिए अनुकरणीय हैं।
उन्होंने श्रीराम के जीवन चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास सिर्फ अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए स्वीकार किया। उन्होंने धर्म की रक्षा की और राक्षसों का नाश किया। यदि श्रीराम महल में रहते, तो वे राजा राम कहलाते, लेकिन उन्होंने धर्म के रास्ते पर चलकर ही मर्यादा पुरुषोत्तम का दर्जा प्राप्त किया।

अभिमान का परिणाम
भूपेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर अभिमान के दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जब धर्म के रास्ते से भटकता है और अभिमान करने लगता है, तो उसका अंत बुरा होता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण को त्रिलोक विजेता माना जाता था, लेकिन उसका अभिमान ही उसके विनाश का कारण बना। उन्होंने सभी से अपील की कि जीवन में कभी अभिमान न करें और धर्म के मार्ग पर चलें।
चाणक्य के सिद्धांतों का उल्लेख
भूपेन्द्र सिंह ने चाणक्य नीति का भी उल्लेख किया और कहा कि दुष्टों की संगत से दूर रहना चाहिए, क्योंकि दुष्ट एक सांप से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं। सांप एक बार काटता है, लेकिन दुष्ट बार-बार हमें नुकसान पहुँचाते हैं।

आयोजन में उपस्थित संत और जनसमूह
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रशेखर गिरी जी महाराज ने श्रीराम कथा प्रवचन किया और धर्म की महत्ता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी और भक्तजन उपस्थित थे। इसके साथ ही, पं. श्री सुनील शास्त्री जी और अन्य आयोजक भी उपस्थित थे जिन्होंने इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
श्रीराम महायज्ञ और श्री राम कथा का आयोजन समाज में धर्म और संस्कारों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया था। इस आयोजन ने उपस्थित जनसमूह को धर्म, नैतिकता और जीवन के मार्ग पर चलने के प्रेरित किया।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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