सागर। सागर शहर की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा का बेतरतीब संचालन आम जनता के लिए बड़ी परेशानी और खतरे का कारण बनता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से सरकार ने ई-रिक्शा संचालन के लिए परमिट की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी, लेकिन अब यही छूट शहर में अव्यवस्था की बड़ी वजह बनती दिखाई दे रही है। पिछले तीन वर्षों में सागर की सड़कों पर 1200 से अधिक ई-रिक्शा उतर चुके हैं और इनके अनियंत्रित संचालन ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि कई स्थानों पर नाबालिग चालक भी खुलेआम ई-रिक्शा चलाते नजर आ रहे हैं। बिना अनुभव और बिना वैध दस्तावेजों के सड़क पर वाहन दौड़ाने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई ई-रिक्शा चालक ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए तेज रफ्तार में वाहन चला रहे हैं, जिससे राहगीरों और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है।
जानकारों के अनुसार ई-रिक्शा को कमर्शियल वाहन की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि इनके संचालन के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद चालक के पास वैध दस्तावेज और वाहन संचालन की पात्रता होना जरूरी है। इसके बावजूद शहर में बड़ी संख्या में ऐसे ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, जिनके चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं हुआ है। इससे केवल सड़क हादसों का ही नहीं, बल्कि यात्रियों के साथ अपराध होने का खतरा भी बढ़ गया है।

नियमों के अनुसार ई-रिक्शा की अधिकतम गति सीमा 25 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। शहर में मुख्य रूप से दो प्रकार के ई-रिक्शा चल रहे हैं — एक तीन सवारी क्षमता वाले और दूसरे चार सवारी पासिंग वाले। लेकिन अधिक कमाई के लालच में कई चालक इनमें क्षमता से अधिक 5 से 6 सवारियां बैठाकर वाहन चला रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण इन हल्के वाहनों का संतुलन बिगड़ने और पलटने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-रिक्शा वजन में हल्के होते हैं और इनका ढांचा भी पारंपरिक ऑटो रिक्शा की तुलना में कम मजबूत होता है। ऐसे में तेज रफ्तार, अचानक मोड़ या कट मारने की स्थिति में इनके पलटने की संभावना अधिक रहती है। शहर में कई बार ई-रिक्शा दुर्घटनाओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें यात्रियों को चोटें भी आई हैं।
इसके बावजूद लोग कम किराए के कारण बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। पेट्रोल से चलने वाले ऑटो रिक्शा की तुलना में ई-रिक्शा का किराया कम होने के कारण आम नागरिक इन्हें सुविधाजनक विकल्प मानते हैं। हालांकि सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब चिंता का विषय बन चुकी है।
ट्रैफिक विभाग भी इस स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। मयंक सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा है कि ई-रिक्शा भले ही परमिट मुक्त श्रेणी में आते हों, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन पर यातायात नियम लागू नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि नाबालिग चालकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और जहां भी नाबालिग ई-रिक्शा चलाते पाए जा रहे हैं, वहां सीधे वाहन मालिक के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चलाने के लिए चालक का बालिग होना और आवश्यक दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। ट्रैफिक पुलिस शहर में विशेष अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर कार्रवाई कर रही है। साथ ही लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओवरलोड ई-रिक्शा में यात्रा न करें।
शहरवासियों का कहना है कि ई-रिक्शा व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को ठोस नीति बनानी चाहिए। कई लोगों ने सुझाव दिया है कि ई-रिक्शा चालकों का अनिवार्य पंजीयन, पुलिस सत्यापन और प्रशिक्षण कराया जाए ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। साथ ही शहर में इनके संचालन के लिए निर्धारित रूट और स्टैंड भी तय किए जाने चाहिए, जिससे यातायात व्यवस्था सुचारू रह सके।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से ई-रिक्शा निश्चित रूप से उपयोगी विकल्प हैं, लेकिन बिना नियमों और नियंत्रण के इनका संचालन अब लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन, ट्रैफिक विभाग और आम नागरिकों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती है कि शहर की सड़कों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।