भोपाल में अपराध का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। शहर में अब छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं की जगह संगठित गैंगवार ने ले ली है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बदमाश खुलेआम सड़कों पर हथियार लहरा रहे हैं, गोलियां चला रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी गैंग की ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी में इस समय 22 गैंग सक्रिय हैं, जबकि इनके 8 बड़े सरगना फिलहाल जेल से बाहर बताए जा रहे हैं। नतीजा यह है कि शहर में रंगदारी, अवैध वसूली, जमीनों पर कब्जा और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर गैंग आपस में भिड़ रहे हैं। लगातार हो रही फायरिंग और तलवारबाजी की घटनाओं ने आम नागरिकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
अस्पताल तक पहुंच गया गैंगवार का आतंक
हाल ही में हुई एक घटना ने राजधानी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बदमाशों के एक गैंग ने पहले अशोका गार्डन इलाके में फायरिंग की और फिर पीछा करते हुए हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंच गए।

अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई गोलीबारी से मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि बदमाशों में अब पुलिस और कानून का डर बेहद कम हो चुका है।
गैंगवार के पीछे क्या हैं कारण?
पुलिस और अपराध विशेषज्ञों के अनुसार इन गैंगवार की मुख्य वजहें आपसी रंजिश, वर्चस्व की लड़ाई, रंगदारी, अवैध वसूली और जमीनों पर कब्जे हैं।
शहर में कई गैंग अब संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। कुछ गैंग सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने प्रभाव और डर का माहौल बनाने के लिए भी कर रहे हैं। अपराधी खुलेआम हथियारों के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट करते हैं, जिससे युवाओं के बीच गलत संदेश जा रहा है।
जानकारी के अनुसार शातिर बदमाश आकाश नीलकंठ उर्फ भूरा हड्डी ने “इल्लीगल” नाम से गैंग बनाई हुई है। इस गैंग पर युवकों और युवतियों के जरिए लोगों को रेप केस में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग करने के आरोप भी लगे हैं।
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं 22 गैंग
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी में कुल 22 गैंग सक्रिय हैं। इनमें से कई गैंग लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं, जबकि कुछ नए गैंग सोशल मीडिया और स्थानीय दबदबे के जरिए तेजी से उभर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई गैंग के सरगना जेल से बाहर आने के बाद फिर से अपने नेटवर्क सक्रिय कर देते हैं। आरोपियों को जल्दी जमानत मिल जाना भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
बीएनएस लागू होने के बाद भी धीमी कार्रवाई
भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद संगठित अपराध के खिलाफ सख्त धाराएं जोड़ी गई थीं। वर्ष 2024 में क्राइम ब्रांच ने पहली बार संगठित अपराध को लेकर एफआईआर दर्ज की थी।
हालांकि इसके बाद कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई। अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सामान्य धाराओं में केस दर्ज करने से गैंग पर असर नहीं पड़ता। जब तक संगठित अपराध कानून के तहत आर्थिक नेटवर्क, हथियार सप्लाई और गैंग संचालन पर एक साथ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
पुलिस कमिश्नर बोले- लगातार कार्रवाई जारी
संजय कुमार ने कहा कि पुलिस लगातार बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि अपराधियों को प्रतिबंधात्मक धाराओं में बाउंड ओवर करने के साथ-साथ एनएसए और जिलाबदर जैसी कार्रवाई भी की जाती है ताकि वे ज्यादा समय तक जेल में रहें या जिले से बाहर रहें।
उन्होंने यह भी कहा कि बीट प्रभारियों और माइक्रो बीट सिस्टम को सक्रिय किया गया है ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि अस्पताल जैसी जगहों पर गोलीबारी की घटनाएं पुलिस और समाज दोनों के लिए अच्छा संदेश नहीं देतीं।
इन घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
राजधानी में हाल के महीनों में हुई कई घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मामला-1
25 मार्च 2026 को शाहजहांनाबाद इलाके में दो गैंग खुलेआम तलवारें लेकर भिड़ गए। इस दौरान एक मासूम बच्ची भी घायल हो गई थी।
मामला-2
14 मार्च 2026 को बदमाश शादाब कुरैशी और उसके साथियों ने तिरंगा चौराहे पर हिस्ट्रीशीटर लल्लू के बेटे इमरान पर गोलियां चलाईं। इसके बाद हमीदिया अस्पताल तक फायरिंग की गई।
मामला-3
6 जुलाई 2025 को नसीम खान ने वीआईपी रोड पर खुलेआम तलवारें लहराकर दहशत फैलाई थी।
सोशल मीडिया बना नया हथियार
अपराधियों के लिए सोशल मीडिया अब केवल दिखावे का माध्यम नहीं, बल्कि गैंग संचालन का हिस्सा बन चुका है। गैंग सदस्य इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर हथियारों के साथ वीडियो डालकर खुद को “डॉन” की तरह पेश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युवाओं में अपराध को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है और गैंग कल्चर को बढ़ावा मिल रहा है।
आम नागरिकों में बढ़ रही असुरक्षा
लगातार हो रही गैंगवार और फायरिंग की घटनाओं ने शहरवासियों के मन में डर पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी अपराधी खुलेआम गोलियां चला रहे हैं, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। पुलिस को संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क, हथियार सप्लायर और गैंग के सोशल मीडिया प्रचार पर भी सख्ती से कार्रवाई करनी होगी।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी में गैंगवार की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।