दमोह के फुटेरा वार्ड क्रमांक-3 में एक मकान की खुदाई के दौरान भारी मात्रा में पुराने चांदी के सिक्के मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मजदूरों और मकान मालिक के अलग-अलग दावों के बीच मामला अब पुलिस, प्रशासन और पुरातत्व विभाग तक पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार यह घटना मकान के पिलर की खुदाई के दौरान हुई, जब मिट्टी के अंदर दबे एक पुराने कलश से चांदी के सिक्के और चांदी जैसी रॉड मिलने का दावा किया गया। शुरुआती अनुमान में मजदूरों ने बताया कि लगभग 35 किलो से अधिक चांदी के सिक्के मिले थे, जबकि मकान मालिक ने केवल 42 सिक्के मिलने की बात कही है।
खुदाई के दौरान कैसे मिला खजाना?
मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और नींव के लिए पिलर की खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान मजदूरों को पहले एक पीतल जैसा कलश मिला। जब उसे खोला गया तो उसमें एक चांदी का सिक्का मिला।

इसके बाद खुदाई और गहरी करने पर मिट्टी के भीतर से बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के निकलने लगे। मजदूरों के मुताबिक कुछ चांदी की रॉड भी मिली थीं, जिन्हें बाद में मकान मालिक द्वारा अपने पास रख लिया गया।
मजदूरों और मकान मालिक के अलग-अलग दावे
मजदूर हीरा पटेल का आरोप है कि जब सिक्के मिले तो उन्हें सूचना देने के बाद मकान मालिक ने पूरी मात्रा अपने पास रख ली और मजदूरों को केवल 500 रुपये देकर वहां से भगा दिया गया। बाद में मजदूरों ने गांव के पूर्व सरपंच को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस तक मामला पहुंचा।
वहीं मकान मालिक आलोक सोनी का कहना है कि मजदूरों की बात गलत है। उनके अनुसार केवल एक कलश मिला था, जिसमें कुछ ही सिक्के थे और बाद में कुल मिलाकर 42 चांदी के सिक्के ही बरामद हुए।
मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन
सूचना मिलते ही पुलिस, तहसीलदार और पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके का निरीक्षण किया। मकान के गड्ढे की जांच की गई और आसपास की खुदाई को भी देखा गया।
बरामद सिक्कों को जब्त कर लिया गया है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
ब्रिटिश कालीन सिक्कों का खुलासा
पुरातत्व विभाग के अनुसार बरामद सिक्के 18वीं–19वीं शताब्दी के ब्रिटिश काल के हैं। इन सिक्कों पर महारानी विक्टोरिया और जॉर्ज पंचम की तस्वीर बनी हुई है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम भी जांच में शामिल हो गई है और सिक्कों की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता का मूल्यांकन किया जा रहा है।
सिक्कों की संख्या और असल सच्चाई पर सवाल
पुलिस के अनुसार अब तक मकान मालिक के पास से 42 सिक्के बरामद किए गए हैं, लेकिन मजदूरों का दावा है कि सिक्कों की संख्या काफी अधिक थी और उन्हें एक बाल्टी में भरकर ले जाया गया था।
इसी विरोधाभास के चलते जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वास्तव में कितनी मात्रा में सिक्के मिले और उनका क्या वितरण हुआ।
कानूनी और ऐतिहासिक पहलू
ऐसे मामलों में पुराने सिक्के या पुरातात्विक वस्तुएं मिलने पर उनका स्वामित्व सीधे व्यक्ति का नहीं माना जाता। नियमों के अनुसार इन वस्तुओं की जानकारी प्रशासन को देना अनिवार्य होता है और पूरी संपत्ति पर सरकार का अधिकार भी हो सकता है।

इसी कारण अब यह मामला केवल चोरी या विवाद तक सीमित न रहकर ऐतिहासिक संपदा की जांच का विषय भी बन गया है।
जांच जारी, कई सवाल बाकी
दमोह में हुई इस घटना ने स्थानीय प्रशासन को भी चौंका दिया है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह कोई पुराना खजाना है, या निर्माण कार्य के दौरान बिखरी हुई ऐतिहासिक संपत्ति।
फिलहाल सिक्कों को सुरक्षित रख लिया गया है और आगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस “खजाने” की असल कहानी क्या है।