सागर, 04 जून 2025
कलेक्टर श्री संदीप जी आर के निर्देशन और उपसंचालक कृषि के मार्गदर्शन में विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत विकासखंड बंडा की ग्राम पंचायतों बिनैका, बेसली और बहरोल में किसानों को प्राकृतिक खेती, बीज उपचार, समन्वित कीट प्रबंधन और मेढ़-नाली पद्धति से सोयाबीन की खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गई।

प्राकृतिक खेती और किफायती उपाय
संयुक्त टीम ने किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदे बताते हुए रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों पर चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.के. तिवारी ने खरीफ फसलों की उन्नत किस्में, बीज उपचार की आवश्यकता और समन्वित पोषक प्रबंधन (IPNM) पर जोर दिया। साथ ही, नरवाई प्रबंधन से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रोगों को कम करने के तरीके बताए।
मेढ़-नाली पद्धति से सोयाबीन की खेती
केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के डॉ. अजय राउल ने मेढ़-नाली पद्धति और चौड़ी बेड बनाकर बुवाई के लाभों पर प्रकाश डाला। इस तकनीक से पानी का संरक्षण, जल निकासी में सुधार और फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने कृषि मशीनीकरण के उपयोग से लागत कम करने और उपज बढ़ाने के तरीके भी साझा किए।

यूरिया-डीएपी के विकल्प और सरकारी योजनाएँ
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री यू.एस. अहिरवार ने किसानों को यूरिया और डीएपी के विकल्पों जैसे जैविक खाद, नीम-कोटेड यूरिया आदि के बारे में जागरूक किया। अनुविभागीय कृषि अधिकारी श्रीमती कुमुद बुनकर ने राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जिनका लाभ उठाकर किसान लागत कम कर सकते हैं।
सामुदायिक सहयोग
इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि और प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। कृषि स्थाई समिति के सभापति श्री हरपाल सिंह ठाकुर ने किसानों को नवीन तकनीकें अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों तक शोध-आधारित कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाकर उनकी आय बढ़ाना है। प्राकृतिक खेती, मेढ़-नाली पद्धति और समेकित कीट प्रबंधन जैसी पद्धतियाँ किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ाएंगी।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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