इंदौर में साइबर ठगी का बड़ा मामला: 19 साल के युवक के खाते से 7.19 लाख रुपये उड़ाए, 5 महीने तक चलता रहा खेल !

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इंदौर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक 19 वर्षीय युवक के बैंक खाते से पांच महीनों के भीतर करीब 7 लाख 19 हजार रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित को इस बड़े नुकसान की भनक तब लगी जब वह नई कार खरीदने के लिए बैंक स्टेटमेंट लेने पहुंचा।

कैसे हुआ पूरा साइबर फ्रॉड?

सराफा थाना क्षेत्र में रहने वाले वंश श्रीमाल, निवासी शक्कर बाजार, का बैंक खाता एसबीआई की इतवारिया बाजार ब्रांच में है। पीड़ित के अनुसार यह पूरा लेन-देन 31 दिसंबर 2025 से 18 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शनों के जरिए किया गया।

इस दौरान अज्ञात साइबर ठगों ने धीरे-धीरे खाते से बड़ी रकम निकाल ली, लेकिन पीड़ित के मोबाइल नंबर या ईमेल पर किसी भी तरह का OTP या ट्रांजैक्शन अलर्ट नहीं आया, जिससे मामला लंबे समय तक छिपा रहा।

स्टेटमेंट से खुला पूरा राज

23 अप्रैल 2026 को जब वंश श्रीमाल कार खरीदने के उद्देश्य से बैंक स्टेटमेंट लेने पहुंचे, तब उन्हें अपने खाते में भारी कमी का पता चला। स्टेटमेंट देखने के बाद उनके होश उड़ गए और तुरंत उन्होंने सराफा थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किस तरह खाते की जानकारी लीक हुई और ट्रांजैक्शन बिना OTP के कैसे हुए।

दूसरी महिला भी बनी शिकार

इसी तरह का एक और साइबर फ्रॉड का मामला तिलक नगर थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां राजश्री अपार्टमेंट, पिपल्याहाना निवासी किरण माउला के खाते से करीब 1 लाख 25 हजार रुपये की ठगी हुई।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक संदिग्ध लिंक/ऐप के माध्यम से उनके खाते से पैसे निकाले गए। इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

साइबर अपराध का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामले यह दिखाते हैं कि अब साइबर ठग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। खासकर UPI आधारित ट्रांजैक्शन में सुरक्षा के बावजूद, फिशिंग लिंक और फर्जी ऐप्स के जरिए डेटा चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस दोनों मामलों में तकनीकी जांच कर रही है और बैंकिंग ट्रांजैक्शन के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी फर्जी ऐप, लिंक या डेटा लीक का इस्तेमाल तो नहीं हुआ।

इंदौर में सामने आए ये दोनों मामले साफ संकेत देते हैं कि साइबर ठग अब आम लोगों को धीरे-धीरे निशाना बनाकर बड़ी रकम उड़ा रहे हैं। जागरूकता की कमी और छोटी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

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