बीना। भानगढ़ थाना क्षेत्र के हड़कल जैन गांव में सड़क निर्माण कार्य के नाम पर चल रहे अवैध मिट्टी खनन के खिलाफ खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध उत्खनन में लगी एक पोकलेन मशीन और दो डंपर जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण कंपनी बीना से उमरिया तक बन रही सड़क परियोजना में उपयोग के लिए अवैध रूप से मिट्टी निकाल रही थी। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनन माफियाओं और निर्माण एजेंसियों में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से हड़कल जैन गांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कंपनी मशीनों की मदद से लगातार जमीन खोद रही थी और निकाली गई मिट्टी को डंपरों के माध्यम से सड़क निर्माण स्थल तक पहुंचाया जा रहा था। गांव के लोगों ने बताया कि बीते एक सप्ताह से दिन-रात मशीनों की आवाज सुनाई दे रही थी और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी हुई थी।
ग्रामीणों के मुताबिक, अवैध खनन का काम इतने खुले तौर पर किया जा रहा था कि आसपास के खेतों और रास्तों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा था। बड़े-बड़े गड्ढे बनने से जमीन की स्थिति खराब हो रही थी और किसानों में चिंता का माहौल था। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो क्षेत्र की सरकारी और निजी जमीनों को भारी नुकसान पहुंच सकता था।

सूत्रों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग को अवैध खनन की शिकायत लगातार मिल रही थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने टीम गठित कर मौके पर दबिश दी। जांच के दौरान मौके पर मशीनों से मिट्टी का उत्खनन होते पाया गया। खनिज विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक पोकलेन मशीन और दो डंपरों को जब्त कर लिया। जब्ती की कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनी और वाहन संचालकों के खिलाफ खनिज नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार सक्रिय है। कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और अन्य सरकारी परियोजनाओं की आड़ में अवैध मिट्टी खनन का खेल लगातार चल रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध मिट्टी खनन केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और भू-संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है। लगातार मिट्टी निकालने से जमीन की उर्वरता प्रभावित होती है और बरसात के समय कटाव एवं जलभराव जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। कई बार बड़े पैमाने पर खनन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रशासन द्वारा समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में यह गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। खासतौर पर सड़क निर्माण और निर्माण कार्यों में मिट्टी की भारी मांग के चलते अवैध उत्खनन तेजी से बढ़ रहा है। मशीनों के माध्यम से रात के समय बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जाती है और फिर उसे डंपरों से निर्माण स्थलों तक पहुंचा दिया जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक खनन माफियाओं और अवैध उत्खनन कराने वाली कंपनियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
बताया जा रहा है कि खनिज विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि कंपनी के पास मिट्टी उत्खनन की वैध अनुमति थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने क्षेत्र में अवैध खुदाई की गई और इससे शासन को कितना राजस्व नुकसान हुआ है। जांच के बाद संबंधित कंपनी पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
बीना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रशासनिक निगरानी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में अवैध खनन का नेटवर्क कैसे सक्रिय बना हुआ है। फिलहाल विभागीय कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनन गतिविधियां बंद कर दी गई हैं, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि कुछ समय बाद फिर से यह कारोबार शुरू हो सकता है।
खनिज विभाग की इस कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई होती रही तो अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।