छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बमीठा क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। पावर हाउस के पास किराए के मकान में रहने वाली तीन वर्षीय मासूम बच्ची पानी से भरे जर्जर टैंक में गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। बेटी को डूबता देख मां भी उसे बचाने के लिए टैंक में कूद गई, लेकिन तैरना नहीं आने के कारण वह खुद भी डूबने लगी। समय रहते पति ने टैंक में छलांग लगाकर पत्नी की जान बचा ली। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, मृत बच्ची की पहचान आरती अहिरवार के रूप में हुई है। आरती अपने माता-पिता और छह बहनों के साथ बमीठा क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थी। परिवार मूल रूप से मजदूरी करता है और करीब एक सप्ताह पहले ही यहां रहने आया था।
परिजनों ने बताया कि रविवार सुबह करीब 5 बजे घर के सभी सदस्य सो रहे थे। इसी दौरान आरती नींद से उठी और बाथरूम जाने के लिए बाहर निकली। बताया जा रहा है कि उसे प्यास लगी थी और वह पानी पीने के लिए मटके के पास पहुंची। घर में रखा मटका एक पुराने और जंग लगे पानी के टैंक के ढक्कन पर रखा हुआ था।
जैसे ही बच्ची ने मटके तक पहुंचने के लिए टैंक के ढक्कन पर वजन डाला, जर्जर ढक्कन अचानक टूट गया और मासूम सीधे गहरे पानी से भरे टैंक में जा गिरी। टैंक काफी गहरा था और उसमें अधिक पानी भरा हुआ था, जिसके कारण बच्ची बाहर नहीं निकल सकी और डूबने से उसकी मौत हो गई।

कुछ देर बाद जब बच्ची की मां सपना अहिरवार की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि आरती बिस्तर पर नहीं है। उन्होंने घबराकर घर के अंदर और आसपास बच्ची की तलाश शुरू की। तलाश करते हुए जब वह पानी के टैंक के पास पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि टैंक का ढक्कन टूटा हुआ है।
सपना ने जैसे ही टैंक के अंदर झांककर देखा, उनकी बेटी पानी में डूबी हुई दिखाई दी। यह दृश्य देखकर वह पूरी तरह घबरा गईं और बिना कुछ सोचे-समझे बेटी को बचाने के लिए खुद भी टैंक में कूद पड़ीं। लेकिन उन्हें तैरना नहीं आता था, इसलिए वह भी पानी में डूबने लगीं।
पानी में संघर्ष करते हुए सपना ने जोर-जोर से चीखकर अपने पति को आवाज दी। पत्नी की चीख सुनते ही बच्ची के पिता तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना देर किए टैंक में छलांग लगा दी। उन्होंने काफी मशक्कत के बाद पत्नी और बच्ची दोनों को बाहर निकाला।
परिजन तुरंत आरती को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मां सपना की हालत भी सदमे के कारण बिगड़ गई। परिवार वालों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देर हो जाती तो मां की भी जान जा सकती थी।
घटना के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास रहने वाले लोग भी इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध हैं। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार को यह जानकारी नहीं थी कि घर में बना पानी का टैंक इतना जर्जर है और उसका ढक्कन किसी भी समय टूट सकता है।
परिवार के लोगों ने बताया कि वे करीब सात दिन पहले ही इस किराए के मकान में रहने आए थे। मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाला यह परिवार बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर यहां आया था, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि मकान में मौजूद एक जर्जर पानी का टैंक उनकी मासूम बेटी की जान ले लेगा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि किराए के मकानों और पुराने भवनों में बने खुले या जर्जर पानी के टैंकों की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। लोगों का कहना है कि कई पुराने मकानों में सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे छोटे बच्चों के लिए लगातार खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में बने खुले पानी के टैंक, कुएं और जल स्रोत छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे स्थानों पर मजबूत ढक्कन और सुरक्षा व्यवस्था होना जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही कई बार पूरे परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख बन जाती है।
छतरपुर में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर घरों में सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। कुछ ही पलों में खेलती-कूदती मासूम आरती हमेशा के लिए अपने परिवार से दूर हो गई, जबकि उसकी मां आज भी उस भयावह दृश्य को याद कर कांप उठती है।