सागर,
सागर जिले में कार्यरत श्री सुरेश कुमार ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल करते हुए सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डॉक्टरेट (PhD) की उपाधि प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल सागर जिले का गौरव बढ़ा है, बल्कि इंजीनियरिंग एवं शोध क्षेत्र में भी एक नई प्रेरणा का संचार हुआ है।
श्री सुरेश कुमार वर्ष 2014 से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने लंबे व्यावसायिक अनुभव के दौरान सड़क निर्माण, अवसंरचना विकास और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे बताते हैं कि उन्हें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के “अपशिष्ट से धन” (Waste to Wealth) के विचार से विशेष प्रेरणा मिली, जिसने उनके शोध कार्य की दिशा निर्धारित की।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि के रूप में श्री सुरेश कुमार ने एनआईटी से बीई (सिविल इंजीनियरिंग), एम.टेक, एमबीए (रेल परिवहन एवं प्रबंधन) तथा एमबीए (परियोजना प्रबंधन) जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त की हैं। इसके पश्चात उन्होंने जनवरी 2019 में लिंगायस विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में पीएचडी के लिए पंजीकरण कराया। वर्ष 2019-20 के दौरान उन्होंने शोध कार्य के लिए आवश्यक कोर्सवर्क सफलतापूर्वक पूर्ण किया और उसके बाद विस्तृत शोध कार्य प्रारंभ किया।

उनका शोध विषय “प्रबल सामग्री का उपयोग करके सबग्रेड मिट्टी की मजबूती बढ़ाना” रहा, जो सड़क निर्माण एवं आधारभूत संरचना विकास के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस शोध में उन्होंने विशेष रूप से नारियल के रेशे (कॉयर फाइबर) से बने जियोटेक्सटाइल के उपयोग पर अध्ययन किया। यह सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है और इसका उपयोग न केवल लागत को कम करता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है।
शोध के दौरान यह पाया गया कि नारियल के अपशिष्ट से निर्मित जियोटेक्सटाइल सबग्रेड मिट्टी की मजबूती बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाएं भी सामने आई हैं। साथ ही, यह तकनीक “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को मजबूत करती है, जिसमें अनुपयोगी पदार्थों को उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जाता है।

श्री सुरेश कुमार के शोध कार्य के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं और शिक्षा एवं तकनीकी जगत द्वारा इसकी सराहना की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह शोध भविष्य में सड़क निर्माण तकनीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है और टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
उनकी इस उपलब्धि पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सहकर्मियों एवं स्थानीय नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। इस सफलता ने सागर जिले का गौरव बढ़ाते हुए यह संदेश दिया है कि निरंतर मेहनत और शोध के माध्यम से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।