जैन साध्वियों की मौत पर आक्रोश: बीना सहित चार शहरों में मौन जुलूस, SIT जांच और हत्या का केस दर्ज करने की मांग तेज !

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सागर
रीवा में जैन साध्वियों की सड़क हादसे में हुई मौत को लेकर पूरे क्षेत्र में जैन समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना को लेकर बीना, खुरई, मालथौन और बांदरी में सोमवार को सकल जैन समाज द्वारा मौन जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। समाजजनों ने इस घटना को केवल दुर्घटना न मानते हुए इसे सुनियोजित साजिश या हत्या की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

बीना में मौन जुलूस इटावा दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सर्वोदय चौक पहुंचा। यहां समाज के प्रतिनिधियों ने तहसीलदार अंबरपंथी को राष्ट्रपति के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि उपलब्ध वीडियो क्लिप्स और परिस्थितियों के आधार पर मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और SIT जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

समाजजनों ने कहा कि यह मामला सामान्य सड़क दुर्घटना जैसा प्रतीत नहीं होता, इसलिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक निर्मला सप्रे ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

इसी तरह खुरई में दिगंबर जैन समाज ने प्राचीन जैन मंदिर से जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया। जुलूस एसडीएम कार्यालय पहुंचा, जहां नायब तहसीलदार शिवमूर्ति सरल को ज्ञापन सौंपा गया। समाजसेवी जिनेंद्र गुरहा ने इस घटना को हत्या करार देते हुए मांग की कि यदि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या साजिश शामिल है तो दोषियों पर हत्या की गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाए।

समाज ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि जैन मुनियों और आर्यिका माताओं के विहार के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मालथौन में भी जैन समाज ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर रीवा पुलिस की प्रारंभिक जांच पर सवाल उठाए। समाजजनों ने आरोप लगाया कि मामले में गंभीरता नहीं बरती गई है और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की शीघ्र गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रकरण में हत्या की धाराओं को शामिल किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

इसी प्रकार बांदरी में दिगंबर जैन मंदिर से लेकर थाने तक मौन जुलूस निकाला गया। यहां भी समाज ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर संतों की सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी नीति बनाए जाने की मांग की। समाजजनों ने कहा कि विहाररत संतों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान एडवोकेट अशोक जैन ने कहा कि जैन समाज हमेशा शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव फैलाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पूरे क्षेत्र में जैन समाज ने एकजुट होकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई और संतों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ा दी है और प्रशासन पर निष्पक्ष जांच तथा ठोस कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है।

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