सागर में यात्री बसों पर बड़ी कार्रवाई: 15 साल पुरानी 2 बसों का पंजीयन निरस्त, 48 बसों की जांच में 6 पर चालानी कार्रवाई !

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सागर,
प्रदेश में सड़क सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को लेकर परिवहन विभाग अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। परिवहन आयुक्त मध्यप्रदेश ग्वालियर तथा सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर जिले में ओवरलोडिंग, अधिक किराया वसूली, परमिट शर्तों के उल्लंघन और टैक्स बकाया यात्री बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) सागर द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 वर्ष से अधिक पुरानी दो यात्री बसों का पंजीयन निरस्त कर उन्हें स्क्रैप करने के आदेश जारी किए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुराने और असुरक्षित वाहनों को सड़कों से हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग का कहना है कि निर्धारित आयु सीमा से अधिक पुराने वाहनों के संचालन से सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए ऐसे वाहनों पर सख्ती बरती जा रही है।

इसी क्रम में प्रभारी अधिकारी, संभागीय सुरक्षा जांच दल सागर द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। यह जांच अभियान बहेरिया तिराहा और आरटीओ कार्यालय के आसपास 25 मई 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित किया गया। अभियान के दौरान विशेष रूप से स्लीपर कोच यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई।

जांच के दौरान एआईएस-119 के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने देखा कि बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगा है या नहीं। साथ ही आग लगने जैसी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार मौजूद हैं या नहीं, इसकी भी जांच की गई।

नियमों के अनुसार प्रत्येक स्लीपर कोच बस में चार इमरजेंसी एग्जिट होना अनिवार्य है। इनमें एक ड्राइवर साइड पीछे की ओर, एक वाहन के सबसे पीछे बीच में तथा दो इमरजेंसी एग्जिट बस की छत पर आगे और पीछे की दिशा में होना चाहिए। प्रत्येक इमरजेंसी गेट का आकार 58 सेंटीमीटर × 90 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा बसों में अग्नि सुरक्षा के लिए 10-10 किलोग्राम के दो अग्निशमन यंत्र होना भी अनिवार्य पाया गया।

परिवहन विभाग ने यह भी जांचा कि किसी भी बस में ड्राइवर पार्टीशन डोर तो नहीं लगाया गया है तथा स्लीपर बर्थ पर स्लाइडर मौजूद तो नहीं हैं। विभागीय नियमों के अनुसार स्लाइडर प्रतिबंधित हैं, जबकि आसानी से खुलने वाले पर्दों की अनुमति दी गई है।

विशेष जांच अभियान के दौरान कुल 48 यात्री बसों की जांच की गई। इनमें से 6 बसों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। कई बसों में किराया सूची चस्पा नहीं थी, अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी थी या उन पर वैधता तिथि अंकित नहीं थी। कुछ बसों में इमरजेंसी गेट आसानी से नहीं खुल रहे थे, जबकि कई मामलों में चालक और परिचालक निर्धारित गणवेश में नहीं पाए गए।

इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने संबंधित बस संचालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चालानी कार्रवाई की। इस दौरान कुल 10 हजार 500 रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने सभी वाहन स्वामियों को निर्देशित किया है कि वे अपने वाहनों के संचालन के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखें। इनमें वाहन का बीमा, फिटनेस प्रमाण पत्र, परमिट, पंजीयन कार्ड, चालक का हैवी ड्राइविंग लाइसेंस, टैक्स प्रमाण पत्र तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र शामिल हैं। विभाग ने टैक्स बकायादार वाहन मालिकों से तत्काल बकाया राशि जमा करने की अपील भी की है।

परिवहन विभाग ने साफ कहा है कि यदि बकाया टैक्स जमा नहीं किया गया तो संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम 1988 तथा मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा और यात्रियों की जान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में यह विशेष अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य बसों और व्यावसायिक वाहनों की भी सघन जांच की जाएगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और यात्रियों को सुरक्षित एवं बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके।

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