सागर,
मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सागर जिले में विकासखंड स्तरीय कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड बंडा के ग्राम धबौली में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली एवं प्राकृतिक खेती विषय पर एक विशेष कृषक संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर एवं “आत्मा” गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशानुसार तथा परियोजना संचालक “आत्मा” के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष श्री लोकेन्द्र सिंह लम्बरदार, संयुक्त संचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी, कृषि विज्ञान केंद्र देवरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आशीष त्रिपाठी, परियोजना संचालक “आत्मा” श्री एम.के. प्रजापति, सहायक संचालक कृषि श्री जितेंद्र सिंह राजपूत, अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्रीमती कुमुद बुनकर सहित कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के कई अधिकारी उपस्थित रहे। संगोष्ठी में 150 से अधिक किसानों एवं प्रगतिशील कृषकों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी आधुनिक एवं प्राकृतिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत तकनीकी सहायक कृषि विज्ञान केंद्र सागर श्री मयंक मेहरा द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती की विस्तृत जानकारी के साथ की गई। उन्होंने किसानों को बताया कि वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती और नैनो उर्वरकों का उपयोग खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बना सकता है। उन्होंने दानेदार उर्वरकों की तुलना में नैनो उर्वरकों के फायदे विस्तार से समझाते हुए कहा कि इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

संयुक्त संचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी ने किसानों को उर्वरक वितरण की नई ई-टोकन प्रणाली के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने किसानों के मोबाइल फोन पर ई-टोकन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन भी किया। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को निर्धारित मात्रा में संतुलित उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे अनावश्यक अधिक उपयोग को रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता बनी रहेगी और फसलों का उत्पादन भी बेहतर होगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा कृषि रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और खेती की लागत को कम करना है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आशीष त्रिपाठी ने खरीफ फसलों की तैयारी पर किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने गहरी जुताई, बीज चयन, बुवाई की सही विधि और मिट्टी की तैयारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे जैविक घोलों के बारे में उदाहरण सहित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक उपायों से खेती की लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
सहायक संचालक कृषि श्री जितेंद्र सिंह राजपूत ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने खेतों से सही तरीके से मिट्टी के नमूने लेने की प्रक्रिया समझाई और प्रत्येक किसान से नियमित मिट्टी परीक्षण कराने का आग्रह किया। उनका कहना था कि मिट्टी की वास्तविक स्थिति जानने के बाद ही उचित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है।
परियोजना संचालक “आत्मा” श्री एम.के. प्रजापति ने रासायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जबकि प्राकृतिक खेती टिकाऊ कृषि का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।
अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्रीमती कुमुद बुनकर ने खरीफ फसलों की वर्तमान परिस्थितियों और मौसम के अनुसार खेती की तैयारी पर चर्चा की। वहीं श्री मयंक मेहरा ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण के आधुनिक उपायों की जानकारी किसानों के साथ साझा की।
जनपद अध्यक्ष श्री लोकेन्द्र सिंह लम्बरदार ने शासन द्वारा लागू की गई ई-टोकन प्रणाली और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल की सराहना की। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेती से जुड़ी जानकारी केवल अधिकृत और वैज्ञानिक माध्यमों से ही प्राप्त करें ताकि गलत सलाह से बचा जा सके।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री यू.एस. अहिरवार ने किसानों को विभागीय योजनाओं और खरीफ फसलों के लिए उपलब्ध बीजों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में किसानों के बीच जीवामृत तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया और इसके लाभ बताए गए।
अंत में विकासखंड तकनीकी प्रबंधक श्रीमती निधि पाण्डेय ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और किसानों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में किसानों ने प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को अपनाने का संकल्प लिया तथा खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।