गंगा दशहरा के पावन अवसर पर खुरई में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बड़े स्तर पर स्वच्छता, श्रमदान और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पठारी रोड स्थित बड़े तालाब के मंदिर घाट पर नगर पालिका के अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर श्रमदान किया तथा जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। अभियान के दौरान तालाब के घाटों से कचरा और पॉलीथिन हटाकर सफाई की गई तथा जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया गया।
सोमवार को आयोजित इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। नगर पालिका द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत तालाब क्षेत्र में साफ-सफाई के साथ-साथ वृक्षारोपण भी किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वयं घाटों पर उतरकर श्रमदान किया और लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के दौरान तालाब के आसपास फैले प्लास्टिक कचरे, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाया गया। उपस्थित लोगों ने साफ-सफाई कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। श्रमदान में नगर पालिका के कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आम नागरिक उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) राजेश मेहतेले ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन का आधार है। लगातार गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट को देखते हुए पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
सीएमओ ने कहा कि यदि अभी से जल संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जल का दुरुपयोग न करें तथा वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाओं को अपनाकर जल संरक्षण में योगदान दें।
कार्यक्रम में मौजूद उपयंत्री शैलेंद्र सिंह ने कहा कि तालाब, कुएं, बावड़ियां और अन्य पारंपरिक जल स्रोत हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले रहा है, जिसमें आम लोगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोगों ने तालाबों और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए श्रमदान किया है, वह समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला कदम है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण का जिम्मा उठाए, तो जल संकट की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में पार्षद कल्लू यादव ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास के तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और पेड़ लगाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं रह सकता।
अभियान के दौरान तालाब के किनारे पौधारोपण भी किया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। लोगों ने पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जल बचाने, जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार कार्य करने की शपथ ली।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस अभियान की सराहना की। लोगों का कहना है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोग जल संरक्षण के महत्व को समझते हैं। कई लोगों ने भविष्य में भी ऐसे श्रमदान कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
गौरतलब है कि प्रदेशभर में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों की सफाई तथा संरक्षण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करना है।
खुरई में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए सामूहिक जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया।