सागर जिले के सांईखेड़ा वेयर हाउस में संचालित गेहूं उपार्जन केंद्र की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति प्रबंधक, उपार्जन केंद्र प्रभारी और वेयर हाउस शाखा प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य विभाग और राजस्व विभाग द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर की गई है।
जानकारी के अनुसार बहुउद्देशीय कृषि साख सहकारी संस्था ढाना द्वारा संचालित गेहूं उपार्जन केंद्र का निरीक्षण सांईखेड़ा वेयर हाउस परिसर में किया गया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं, जिनसे उपार्जन व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। जांच में पाया गया कि केंद्र प्रभारी श्रीमती संगीता तिवारी निरीक्षण के समय अनुपस्थित थीं और उपार्जन केंद्र संचालन से संबंधित कोई वैध अनुमति या प्रशासनिक आदेश मौके पर उपलब्ध नहीं था।
जांच दल ने यह भी पाया कि बिना सक्षम अनुमति के उपार्जन स्थल में परिवर्तन कर वेयर हाउस परिसर में गेहूं का भंडारण किया जा रहा था। यह कार्रवाई शासन की निर्धारित उपार्जन नीति और नियमों के विपरीत पाई गई। अधिकारियों के अनुसार किसी भी उपार्जन केंद्र का स्थल परिवर्तन संबंधित सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता, लेकिन यहां ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में गेहूं से भरी बिना सिली हुई बोरियां भी पाई गईं। इन बोरियों पर न तो आवश्यक स्टेंसिल लगाए गए थे और न ही किसानों के कोड अंकित थे। सामान्यतः उपार्जित अनाज की प्रत्येक बोरी पर किसान का कोड, उपार्जन केंद्र की जानकारी और अन्य आवश्यक चिन्ह अंकित किए जाते हैं, ताकि रिकॉर्ड पारदर्शी बना रहे और किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। लेकिन यहां व्यवस्थाएं पूरी तरह अव्यवस्थित पाई गईं, जिससे अधिकारियों ने उपार्जित गेहूं के संभावित अपयोजन और गड़बड़ी की आशंका जताई है।
प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि खरीदी स्थल और भंडारण स्थल एक ही परिसर में होने के बावजूद बोरियों का परिवहन कराया जा रहा था। अधिकारियों ने इसे समय और सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में माना है। जांच अधिकारियों के अनुसार जब खरीदी और भंडारण एक ही स्थान पर हो रहा था, तब परिवहन की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद परिवहन दर्शाया जाना संदेह पैदा करता है।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर समिति प्रबंधक श्री सूर्यकांत दुबे और केंद्र प्रभारी श्रीमती संगीता तिवारी के खिलाफ उपार्जन नीति की विभिन्न कंडिकाओं के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्हें उपार्जन कार्य से पृथक करने, संस्था को ब्लैकलिस्ट करने तथा उनके विरुद्ध पुलिस अभियोजन की कार्रवाई क्यों न की जाए।
इसी प्रकार मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन शाखा सांईखेड़ा के प्रभारी श्री मुकेश परमार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। निरीक्षण के दौरान वे उपार्जन केंद्र संचालन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इतना ही नहीं, उन्हें केंद्र प्रभारी की जानकारी तक उपलब्ध नहीं थी। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही और पदीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता माना है।
जांच प्रतिवेदन में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया है कि उपार्जन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों की मेहनत और शासन की योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब प्राप्त होने के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों और संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सेवा से पृथक्करण, ब्लैकलिस्टिंग और पुलिस मामला दर्ज किए जाने जैसी कार्रवाई भी शामिल है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं। किसानों से खरीदे गए अनाज का सुरक्षित भंडारण और सही रिकॉर्ड बनाए रखना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सांईखेड़ा वेयर हाउस में सामने आई अनियमितताओं ने प्रशासन को चिंतित कर दिया है।
अब इस कार्रवाई को जिले में उपार्जन कार्य से जुड़े अन्य केंद्रों के लिए भी एक सख्त संदेश माना जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य उपार्जन केंद्रों की भी सघन जांच की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या लापरवाही को रोका जा सके।