संत रविदास मंदिर परिसर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, कलेक्टर प्रतिभा पाल ने किया निरीक्षण !

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Sagar के बड़तूमा क्षेत्र में निर्माणाधीन संत रविदास मंदिर परिसर का मंगलवार को कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को शेष कार्य शीघ्र पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए। कलेक्टर ने विशेष रूप से निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने परिसर में बनाए जा रहे ऑडिटोरियम, आधुनिक संग्रहालय, भक्त निवास और डॉरमेट्री भवनों का विस्तार से अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए मंदिर परिसर के मॉडल का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों से तकनीकी जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में जारी निर्माण कार्यों की प्रगति, डिजाइन और भविष्य की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी।

कलेक्टर ने कहा कि लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से 11 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा यह भव्य संत रविदास मंदिर परिसर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह देश और दुनिया के लोगों को भारतीय संत परंपरा, सामाजिक समरसता और संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन दर्शन से परिचित कराने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य संत रविदास के विचारों, सामाजिक समानता के संदेश और ईश्वर के प्रति उनकी समर्पण भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संग्रहालय भवन में बनने वाली व्यवस्थाओं को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संग्रहालय में संत रविदास के जीवन प्रसंगों, उनके विचारों और समाज सुधार से जुड़े संदेशों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और दृश्य-श्रव्य संसाधनों की मदद से आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाले समय में शोधार्थियों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

ऑडिटोरियम के निरीक्षण के दौरान भी उन्होंने निर्माण एजेंसी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। परिसर में पर्याप्त रोशनी, हवा, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कलेक्टर ने मंदिर निर्माण की स्थापत्य शैली को लेकर भी जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया जा रहा है और इसकी ऊंचाई लगभग 66 फीट होगी। खास बात यह है कि मंदिर निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं किया जा रहा है। मंदिर के निर्माण में राजस्थान के प्रसिद्ध बंसीपहाड़पुर के लाल पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिन पर बारीक नक्काशी की जा रही है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि मंदिर के गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। सड़क स्तर से लगभग पांच फीट ऊंचा फाउंडेशन तैयार होने के बाद नक्काशीदार पत्थरों के 72 विशाल स्तंभ स्थापित किए जा चुके हैं, जिनके ऊपर मंदिर का मुख्य ढांचा खड़ा किया जा रहा है। कलेक्टर ने निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण करते हुए कहा कि कार्यों में मजबूती और सौंदर्य दोनों का संतुलन बनाए रखा जाए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने आगामी बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि परिसर में जलभराव की स्थिति न बने, इसके लिए समुचित जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना समयसीमा में पूरी होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि समाज को संत रविदास के समानता और मानवता के संदेश से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक के.वी., एसडीएम श्री अमन मिश्रा, निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी एवं अन्य संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कलेक्टर को निर्माण कार्यों की प्रगति और आगामी कार्ययोजना से भी अवगत कराया।

संत रविदास मंदिर परिसर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह परियोजना सागर जिले की एक महत्वपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान के रूप में स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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